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कमरे में सिमट कर रह गई लोकगायक संतराम और आनंदी की आवाज
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लोक गायक संत राम और आनंदी देवी।
- फोटो : ALMORA
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। लोकगायक संतराम और उनकी पत्नी आनंदी देवी दृष्टिहीन हैं। वह लोकपर्वों, मेले, मंदिरों और शादी ब्याह आदि कार्यक्रमों में जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करके थोड़ी बहुत कमाई कर अपना गुजारा करते थे लेकिल कोरोना महामारी के कारण पिछले करीब पांच माह से दोनों धौलछीना में एक कमरे तक की सीमित होकर रह गए। मेले, महोत्सव, मंदिर कहीं भी सांस्कृतिक गतिविधियां नहीं हो पा रही हैं जिससे वह अपना कला धर्म नहीं निभा पा रहे हैं और उन्हें कुछ आय भी नहीं हो रही है।
भैंसियाछाना ब्लाक के ग्राम पिपली हाल निवासी धौलछीना संतराम जन्म से ही दृष्टिहीन हैं। ईश्वर ने उन्हें आंखों की रोशनी तो नहीं दी किंतु मधुर कंठ जरूर दिया। इसके चलते शुरू में संतराम आसपास के गांवों में रोपाई गुड़ाई के वक्त लगने वाले बौल प्रस्तुत करते थे। फिर जागेश्वर के श्रावणी मेला, अल्मोड़ा नंदा देवी महोत्सव, चितई गोलू महोत्सव, धौलछीना विमल कोट महोत्सव सहित शादी ब्याह के मौके पर वह हुड़के की थाप पर अपनी आवाज का जादू बिखेरने लगे। करीब 20 साल पहले संतराम ने अपने सहारे के लिए अल्प दृष्टि बाधित आनंदी देवी को जीवन संगिनी बनाया लेकिन विडंबना यह रही कि कुछ साल बाद आनंदी देवी की आंखों की रोशनी भी पूरी तरह चली गई। आनंदी देवी भी लोक गायिका हैं और पति संतराम का बराबर साथ देती हैं। कोरोना के कारण दोनों ही पिछले काफी समय से मेले, महोत्सवों में भागीदारी नहीं कर सके हैं, जिससे वह काफी निराश हैं। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना महामारी का अंत होगा, फिर से मेले होने लगेंगे और उन्हें भी अपनी लोक कला को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
आवास की हालत ठीक नहीं, भीतर घुस रहा है बारिश का पानी
धौलछीना। लोक गायक संतराम ने जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर धौलछीना में स्थित एक सरकारी कमरे में 36 साल से शरण ले रखी है। कुछ समय पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर उनके कमरे की मरम्मत की गई लेकिन अब कमरे की हालत फिर खराब हो चुकी है। बरसात में पानी भीतर घुस रहा है। कई बार पीने का पानी लाने के लिए उन्हें सड़क पार करनी पड़ती है। दृष्टिबाधित होने के कारण हमेशा दुर्घटना का भय बना रहता है। संतराम और आनंदी ने अपने इस घर की मरंमत कराने और इस स्थान पर एक पानी का कनेक्शन दिलाने का आग्रह किया है। व्यापार मंडल पदाधिकारियों के अलावा कुछ अन्य लोग इस दंपति की आर्थिक मदद करते हैं, जिससे वह भोजन के लिए मोहताज नहीं हैं।
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फोटो- (07एएलएम24पी)
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भैंसियाछाना ब्लाक के ग्राम पिपली हाल निवासी धौलछीना संतराम जन्म से ही दृष्टिहीन हैं। ईश्वर ने उन्हें आंखों की रोशनी तो नहीं दी किंतु मधुर कंठ जरूर दिया। इसके चलते शुरू में संतराम आसपास के गांवों में रोपाई गुड़ाई के वक्त लगने वाले बौल प्रस्तुत करते थे। फिर जागेश्वर के श्रावणी मेला, अल्मोड़ा नंदा देवी महोत्सव, चितई गोलू महोत्सव, धौलछीना विमल कोट महोत्सव सहित शादी ब्याह के मौके पर वह हुड़के की थाप पर अपनी आवाज का जादू बिखेरने लगे। करीब 20 साल पहले संतराम ने अपने सहारे के लिए अल्प दृष्टि बाधित आनंदी देवी को जीवन संगिनी बनाया लेकिन विडंबना यह रही कि कुछ साल बाद आनंदी देवी की आंखों की रोशनी भी पूरी तरह चली गई। आनंदी देवी भी लोक गायिका हैं और पति संतराम का बराबर साथ देती हैं। कोरोना के कारण दोनों ही पिछले काफी समय से मेले, महोत्सवों में भागीदारी नहीं कर सके हैं, जिससे वह काफी निराश हैं। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना महामारी का अंत होगा, फिर से मेले होने लगेंगे और उन्हें भी अपनी लोक कला को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
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आवास की हालत ठीक नहीं, भीतर घुस रहा है बारिश का पानी
धौलछीना। लोक गायक संतराम ने जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर धौलछीना में स्थित एक सरकारी कमरे में 36 साल से शरण ले रखी है। कुछ समय पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर उनके कमरे की मरम्मत की गई लेकिन अब कमरे की हालत फिर खराब हो चुकी है। बरसात में पानी भीतर घुस रहा है। कई बार पीने का पानी लाने के लिए उन्हें सड़क पार करनी पड़ती है। दृष्टिबाधित होने के कारण हमेशा दुर्घटना का भय बना रहता है। संतराम और आनंदी ने अपने इस घर की मरंमत कराने और इस स्थान पर एक पानी का कनेक्शन दिलाने का आग्रह किया है। व्यापार मंडल पदाधिकारियों के अलावा कुछ अन्य लोग इस दंपति की आर्थिक मदद करते हैं, जिससे वह भोजन के लिए मोहताज नहीं हैं।
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फोटो- (07एएलएम24पी)