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हुड़किया बौल सोमनाथ मंदिर सोमेश्वर में रोपे फूल के पौधे
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सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सावन माह के तीसरे सोमवार को सोमेश्वर स्थित सोमनाथ मंदिर परिसर के खेतों में महिलाओं द्वारा परंपरा के अनुसार फूल के पौधों की रोपाई की जाती है। हुड़किया बौल के साथ महिलाओं ने सोमवार को मंदिर परिसर में फूल के पौधों की रोपाई की। महिलाओं ने झोड़े भी गाए।
सुबह मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए काफी संख्या में भक्तजन पहुंचे। लोगों ने मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके पश्चात आसपास के कई गांवों की महिलाएं और नव विवाहिताएं मंदिर परिसर के खेतों में फूल के पौधे रोपने पहुंचीं।
लोक कलाकार मदन मोहन सनवाल, विशन राम, भगवत राम के हुड़का बजाने और पंचनामा देवा, तुम है जाया दयालु हाथ जोड़ी अरज करनूं त्यारा दरबारा गीत गाने के साथ फूल के पौधों की रोपाई शुरू हुई। महिलाओं ने हुड़के की थाप पर गीत गाकर मंदिर परिसर के खेतों में फूल के पौधे रोपे।
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महिलाओं और लोक कलाकारों ने महादेवा हो तुमरी शरणा, ऐ रीना हो, सबूंकी रक्षा करिया रक्षा हो गीत भी गाया। मान्यता है कि सावन के तीसरे सोमवार को महिलाओं और नव विवाहिताओं द्वारा मंदिर परिसर में फूल के पौधों की रोपाई करने से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। फूल की पौध रोपाई और झोड़े गाने में अर्जुनराठ, भानाराठ, मल्ला खोली, रतुराठ, जैंचोली, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, सर्प, माला, रैत, अधूरिया, भंडारी गांव, टाना, बमनफल्यां, बैगनियां, जाल, धौलाड़, चनौदा, महरागांव, खाड़ी, दियारी, चनोली खीराकोट, नारंगतोली आदि गांवों की महिलाओं ने भाग लिया।
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सुबह मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए काफी संख्या में भक्तजन पहुंचे। लोगों ने मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके पश्चात आसपास के कई गांवों की महिलाएं और नव विवाहिताएं मंदिर परिसर के खेतों में फूल के पौधे रोपने पहुंचीं।
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लोक कलाकार मदन मोहन सनवाल, विशन राम, भगवत राम के हुड़का बजाने और पंचनामा देवा, तुम है जाया दयालु हाथ जोड़ी अरज करनूं त्यारा दरबारा गीत गाने के साथ फूल के पौधों की रोपाई शुरू हुई। महिलाओं ने हुड़के की थाप पर गीत गाकर मंदिर परिसर के खेतों में फूल के पौधे रोपे।
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महिलाओं और लोक कलाकारों ने महादेवा हो तुमरी शरणा, ऐ रीना हो, सबूंकी रक्षा करिया रक्षा हो गीत भी गाया। मान्यता है कि सावन के तीसरे सोमवार को महिलाओं और नव विवाहिताओं द्वारा मंदिर परिसर में फूल के पौधों की रोपाई करने से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। फूल की पौध रोपाई और झोड़े गाने में अर्जुनराठ, भानाराठ, मल्ला खोली, रतुराठ, जैंचोली, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, सर्प, माला, रैत, अधूरिया, भंडारी गांव, टाना, बमनफल्यां, बैगनियां, जाल, धौलाड़, चनौदा, महरागांव, खाड़ी, दियारी, चनोली खीराकोट, नारंगतोली आदि गांवों की महिलाओं ने भाग लिया।