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तिपौलासेरा, टूनाकोट की सात हेक्टेयर उपजाऊ भूमि लील गई आपदा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 11:45 PM IST
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Flood Devasted 7 Hactare Fertile land
कुजगढ़ नदी के उफान से रौखड़ हुए टूनाकोट सेरा के खेत। संवाद - फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। सब्जी और अनाज उत्पादन के लिए मशहूर ताड़ीखेत विकासखंड के सुदूरवर्ती टूनाकोट तथा तिपौला सेरा में आपदा आफत बनकर बरसी है। कुजगढ़ नदी ने ग्रामीणों की सात हेक्टेयर उपजाऊ भूमि लील ली। यही नहीं चार नहरें भी नदी की भेंट चढ़ गई। धान की फसल और अदरक पूरी तरह से तबाह हो गया। किसानों में मायूसी छाई हुई है। यहां के काश्तकार साल भर के लिए अनाज और सब्जियों का उत्पादन कर लेते थे।
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टूनाकोट और तिपौला सेरा की जमीनें कुजगढ़ नदी से जुड़ी हुई हैं। 1992 में भी यहां आपदा आई थी, तब भी सिंचाई नहरें बह गई थीं। हालांकि बाद में जिला प्रशासन के निर्देश पर नहरें बनी और कई स्थानों पर बाढ़ से बचाव को तटबंध भी बनाए गए लेकिन पिछले रविवार को हुई अतिवृष्टि के कारण कुजगढ़ नदी उफान पर थी। जिस कारण पानी के बहाव से भूमि में जबरदस्त कटाव हुआ और देखते ही देखते सात हेक्टेयर भूमि आपदा की भेंट चढ़ गई। यहां के काश्तकार काफी मेहनती हैं।
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सूअर, बंदरों से भी अपने अनाज की रक्षा ग्रामीण बारी लगाकर स्वयं करते हैं। यहां बीन्स, फूल गोभी, टमाटर, मटर, आलू, प्याज जैसी सब्जियों का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। जिस कारण ग्रामीणों की आजीविका भी चलती है। धान की रोपाई होती है, लेकिन अब सिंचाई नहरें बहने से तमाम दिक्कतें आ गई हैं। इधर, संयुक्त मजिस्ट्रेट जय किशन ने बताया कि निरीक्षण कर लिया गया है। आकलन जिला प्रशासन को भेजा जा रहा है।
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-हमारे यहां के ग्रामीण खेती किसानी के लिए काफी मेहनत करते हैं, जिस कारण उनकी आजीविका चलती है, लेकिन बेमौसमी बरसात ने सब कुछ तबाह कर दिया है। ग्रामीणों को काफी नुकसान हुुआ है। नदी से बचाव के लिए जिला प्रशासन को तटबंध बनाने चाहिए। सिंचाई नहरों को ठीक करने का कार्य शीघ्र शुरू होना चाहिए।-मदन माहरा, टूनाकोट, ताड़ीखेत।

-बेमौसमी बारिश आफत बनकर टूटी है। तमाम खेत रौखड़ में तब्दील हो गए हैं। अदरक बोया था सब कुछ तबाह हो गया है। कई लोगों ने धान की फसल तक नहीं काटी थी, वह भी नदी की भेंट चढ़ गई है। हालांकि प्रशासन की टीम ने मुआयना कर लिया है। अब प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने की कार्रवाई शुरू होनी चाहिए। जिससे उन्हें कुछ राहत मिलेगी। महेंद्र सिंह माहरा, टूनाकोट, ताड़ीखेत।
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