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चौखुटिया के लखनपुर में मिली पांच मुहाने वाली सुरंग

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2021 11:06 PM IST
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Five mouth tunnels found in Lakhanpur of Chowkutia
अल्मोड़ा के चौखुटिया के लखनपुर में कत्यूरी शासकों के समय की मानवनिर्मित पांच मुंह वाली सुरंग मि? - फोटो : ALMORA
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। कत्यूरी राजाओं की राजधानी के नाम से इतिहास में दर्ज लखनपुर क्षेत्र में पांच ओर से खुलने वाली गुफा का पता चला है। पुरातत्व विभाग की टीम ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग और गैरसैंण राजधानी क्षेत्र के निकट होने के चलते पर्यटन की दृष्टि से सुरंग का बड़ा महत्व है। उन्होंने बताया कि इस बाबत पुरातत्व विभाग की केंद्रीय टीम को भी जानकारी दी जा रही है।
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पुरातत्व विभाग के मंडलीय प्रभारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि लखनपुर में कुंड और किले आदि तो वे पहले ही देख चुके हैं। ग्रामीणों ने पांच मुंह वाली सुरंग की जानकारी दी तो टीम के साथ मौके पर जाकर सुरंग को देखा। पांच छोरों में से एक छोर की लंबाई 50 मीटर बताई जा रही है। इस बाबत पुरात्व विभाग की केंद्रीय टीम को भी अवगत करा दिया गया है। राजकीय महाविद्यालय चौखुटिया में इतिहास के प्राध्यापक डा. प्रभाकर त्यागी, शेखर उपाध्याय, जगत सिंह मेहर व अर्जुन सिराड़ा भी दल में मौजूद थे।।
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देश-विदेश के पर्यटक हो सकते हैं आकर्षित
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। पिछले कुछ समय से लखनपुर किले के शोध कार्य में लगे राजकीय महाविद्यालय के इतिहास के प्राध्यापक प्रभाकर त्यागी का कहना है कि क्षेत्रीय लोगों ने पहले ही इस बारे में बताया था, पर सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के चलते हुई खुदाई में सुरंग के पांचों सिरे दिखाई दिए हैं। सुरंग आदि की सफाई करके सुरंग की पत्थर और शिलाओं को बड़ी महीनता से तराशा गया है। इस ओर सक्रियता से अन्वेषण करने और सभी अवशेषों को व्यवस्थित करने से देश, विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। यह राज्य की महत्वपूर्ण धरोहर है।
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कुछ लोग इसे गुफा समझ रहे हैं असल में यह सुरंग है। गुफा प्राकृतिक रूप से बन जाती है, जबकि सुरंग मानव निर्मित होती है। इस सुरंग का निर्माण मानव शक्ति से किया गया है जो साफ नजर आ रहा है। यह क्षेत्र पर्यटन के साथ ही शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। - डा. चंद्रसिंह चौहान मंडलीय अधिकारी पुरातत्व विभाग

आठवीं शताब्दी की हो सकती है सुरंग
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। शोध में जुटे महाविद्यालय के इतिहास के प्राध्यापक डा. प्रभाकर त्यागी का कहना है कि सुरंग आठवीं या नवीं शताब्दी की प्रतीत हो रही हैं। इन सुरंगों को कत्यूरी शासकों की ओर से बनवाया गया था। सुरंग निर्माण के पीछे सामरिक और धार्मिक कारण हो सकते हैं। कत्यूरी शासक अपने साम्राज्य का बचाने के लिए सुरक्षित या ऊंचाई वाले स्थानों पर आए वहीं इसके निकट रामगंगा नदी और निकटवर्ती क्षेत्रों में पौराणिक मंदिर आदि भी हैं। इस लिहाज से इसके धार्मिक कारण भी हो सकते हैं। सुरंग के अंदर बने चित्रों में गणेश जी आदि देवी देवताओं के चित्र नजर आ रहे हैं। (संवाद)
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