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गगास घाटी में प्याज की नर्सरी तैयार करने में जुट गए हैं काश्तकार
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गगास घाटी के मकणों गांव में प्याज की नसरी तैयार करता काश्तकार। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्याज के भाव बाजार में निरंतर बढ़ रहे हैं। महंगाई देख लोगों ने दोबारा प्याज की खेती शुरू कर दी है। रानीखेत में गगास घाटी का प्याज काफी मशहूर है। किसानों ने प्याज की नर्सरी तैयार कर ली है। वहां नवंबर तक पौध तैयार हो जाएगी। गगास घाटी का प्याज इतना मशहूर है कि किसानों को मांग पूरी करना कठिन हो जाता है। कुमाऊं समेत गढ़वाल से लगे इलाकों में भी इसे खूब पसंद किया जाता है। इस क्षेत्र के किसान सीजन में दो से तीन लाख रुपये तक की पौध बेच देते हैं।
शहर से 19 किमी की दूरी पर स्थित गगास घाटी के मकड़ौं, मंगचौड़ा सहित कई इलाकों में व्यापक मात्रा में प्याज की पौध उगाई जाती है। सितंबर और अक्तूबर में किसान एक से लेकर पांच नाली तक की भूमि में बीज बोते हैं। निराई, गुड़ाई और खरपतवार निकालने के बाद 15 नवंबर तक पौध तैयार हो जाती है। ग्रामीण सोमेश्वर, गरुड़, बागेश्वर, हवालबाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चौखुटिया, मुनस्यारी, चंपावत, डीडीहाट, धारचूला आदि क्षेत्रों में प्याज की पौध बेचते हैं। मकड़ों के किसान राजेंद्र बिष्ट, मंगचौड़ा के खुशाल सिंह ने बताया कि प्याज की महंगाई के कारण दो, तीन वर्षों से पौध की मांग बढ़ रही है। महंगाई के चलते वर्षों से प्याज का उत्पादन बंद कर चुके कई किसान अब फिर से प्याज की नर्सरी तैयार करने लगे हैं।
स्वयं बीज तैयार करते हैं गगास घाटी के किसान
रानीखेत (संवाद)। गगास घाटी के किसान स्वयं प्याज का बीज तैयार करते हैं। इस प्याज की खासियत यह है कि इसके पौधे के ऊपर फूल नहीं आता। इस कारण गांठ भी बड़ी निकलती है। फूल वाली पौध ठीक नहीं मानी जाती। गगास घाटी की प्याज की पौध के नाम पर कई क्षेत्रों में लोग घाटी का नाम लेकर गलत प्याज की पौध तक बेच देते हैं। बागेश्वर, गरुड़, रानीखेत सहित कई स्थानों में इस तरह के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। किसान खुशाल सिंह ने बताया कि वह वजन के आधार पर प्याज की पौध को पहचान लेते हैं।
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शहर से 19 किमी की दूरी पर स्थित गगास घाटी के मकड़ौं, मंगचौड़ा सहित कई इलाकों में व्यापक मात्रा में प्याज की पौध उगाई जाती है। सितंबर और अक्तूबर में किसान एक से लेकर पांच नाली तक की भूमि में बीज बोते हैं। निराई, गुड़ाई और खरपतवार निकालने के बाद 15 नवंबर तक पौध तैयार हो जाती है। ग्रामीण सोमेश्वर, गरुड़, बागेश्वर, हवालबाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चौखुटिया, मुनस्यारी, चंपावत, डीडीहाट, धारचूला आदि क्षेत्रों में प्याज की पौध बेचते हैं। मकड़ों के किसान राजेंद्र बिष्ट, मंगचौड़ा के खुशाल सिंह ने बताया कि प्याज की महंगाई के कारण दो, तीन वर्षों से पौध की मांग बढ़ रही है। महंगाई के चलते वर्षों से प्याज का उत्पादन बंद कर चुके कई किसान अब फिर से प्याज की नर्सरी तैयार करने लगे हैं।
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स्वयं बीज तैयार करते हैं गगास घाटी के किसान
रानीखेत (संवाद)। गगास घाटी के किसान स्वयं प्याज का बीज तैयार करते हैं। इस प्याज की खासियत यह है कि इसके पौधे के ऊपर फूल नहीं आता। इस कारण गांठ भी बड़ी निकलती है। फूल वाली पौध ठीक नहीं मानी जाती। गगास घाटी की प्याज की पौध के नाम पर कई क्षेत्रों में लोग घाटी का नाम लेकर गलत प्याज की पौध तक बेच देते हैं। बागेश्वर, गरुड़, रानीखेत सहित कई स्थानों में इस तरह के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। किसान खुशाल सिंह ने बताया कि वह वजन के आधार पर प्याज की पौध को पहचान लेते हैं।
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