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कृषि विधेयक किसान और जनविरोधी : कुंजवाल
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अल्मोड़ा में पत्रकारों से वार्ता करते विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि विधेयक किसान और आमजन विरोधी हैं। इससे जहां किसानों का अहित होगा वहीं देश में महंगाई बढ़ेगी। पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक अडानी जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए हैं। सरकार देश को पूंजीपितयों के हाथों गिरवी रखने की साजिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि विधेयक में निजी कंपनियों को मंडी चलाने की अनुमति दे दी है, जो कि सरकारी मंडियों को समाप्त करने की साजिश है। इससे मंडियों में काम कर रहे कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। निजी कंपनियों को अनाज भंडारण करने की खुली छूट दे दी गई है। यह कंपनियां किसानों से कम दाम पर उपज खरीदकर महंगे दाम पर बेचेंगी। इससे जमाखोरी बढ़ेगी और निजी कंपनियों की मनमानी चलेगी। बाजार में जरूरी वस्तुओं का अभाव बना रहेगा और महंगाई बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों की जमीन 25 साल तक लीज पर लेने की छूट दे दी गई है, जो छोटे और जरूरतमंद किसानों के खिलाफ है। ऐसे में सस्ते गल्ले की दुकानों की प्रणाली भी समाप्त हो जाएगी।
कुंजवाल ने कहा कि देश के किसान संगठनों के साथ ही आरएसएस का किसान संगठन भी इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में 10 से अधिक कामगारों वाली फैक्ट्री श्रम कानून के अंतर्गत आती थी, जिससे श्रमिकों के हित सुरक्षित रहते थे। अब 300 कार्मिकों वाली फैक्ट्री मालिकों को छूट दे दी गई है। वह अपने कामगारों को कभी भी निकाल सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर उत्तराखंड पर पड़ेगा। कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति से कृषि अध्यादेश को मंजूरी नहीं देने की मांग की है। कांग्रेस इसके खिलाफ पूरे देश में आंदोलन करेगी। इस मौके पर जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, उपाध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता तिवारी, राजीव कर्नाटक आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि विधेयक में निजी कंपनियों को मंडी चलाने की अनुमति दे दी है, जो कि सरकारी मंडियों को समाप्त करने की साजिश है। इससे मंडियों में काम कर रहे कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। निजी कंपनियों को अनाज भंडारण करने की खुली छूट दे दी गई है। यह कंपनियां किसानों से कम दाम पर उपज खरीदकर महंगे दाम पर बेचेंगी। इससे जमाखोरी बढ़ेगी और निजी कंपनियों की मनमानी चलेगी। बाजार में जरूरी वस्तुओं का अभाव बना रहेगा और महंगाई बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों की जमीन 25 साल तक लीज पर लेने की छूट दे दी गई है, जो छोटे और जरूरतमंद किसानों के खिलाफ है। ऐसे में सस्ते गल्ले की दुकानों की प्रणाली भी समाप्त हो जाएगी।
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कुंजवाल ने कहा कि देश के किसान संगठनों के साथ ही आरएसएस का किसान संगठन भी इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में 10 से अधिक कामगारों वाली फैक्ट्री श्रम कानून के अंतर्गत आती थी, जिससे श्रमिकों के हित सुरक्षित रहते थे। अब 300 कार्मिकों वाली फैक्ट्री मालिकों को छूट दे दी गई है। वह अपने कामगारों को कभी भी निकाल सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर उत्तराखंड पर पड़ेगा। कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति से कृषि अध्यादेश को मंजूरी नहीं देने की मांग की है। कांग्रेस इसके खिलाफ पूरे देश में आंदोलन करेगी। इस मौके पर जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, उपाध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता तिवारी, राजीव कर्नाटक आदि मौजूद रहे।
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