रानीखेत (अल्मोड़ा)। लेह लद्दाख की गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों पर चीन सैनिकों की बर्बरता से आक्रोशित पूर्व सैनिक जरूरत पड़ने पर सीमा पर जाने को तैयार हैं। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेवानिवृत्त होने पर हथियार रख दिए हैं, चलाना नहीं भूले हैं। सेना के एक आह्वान पर पूर्व सैनिक सीमा की ओर चल पड़ेंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में पूर्व सैनिकों ने जरूरत पड़ने पर सीमा पर जाने और हथियार उठाने की बात कही है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन हमेशा छलबल करता रहा है। गलवां घाटी में इस बार भी यही रणनीति चीन ने अपनाई है। संस्था के प्रदेश महासचिव पूर्व सूबेदार हरी सिंह नेगी ने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय सेना का कोई सानी नहीं है। दुश्मन से हर स्थिति में पार पाने का माद्दा भारतीय सेना में है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि वह हथियार चलाना नहीं भूले हैं। जरूरत पड़ने पर वह भी सीमाओं पर जाकर लड़ सकते हैं। ज्ञापन भेजने वालों में बचे सिंह कुवार्बी, आरडी उपाध्याय, प्रेम सिंह फर्त्याल, शेखर चंद्र पुजारी, गोविंद सिंह रावत आदि रहे।