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ईई, कानूनगो, पटवारी को 24 घंटे बाद छोड़ा ग्रामीणों ने
ब्यूरो /अमर उजाला, मौलेखाल (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 06 Dec 2015 12:25 AM IST
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पैसिया-गड़कोट और थला-भीताकोट मार्गों के निर्माण की मांग को लेकर गड़कोट में चल रहे आंदोलन के दौरान वार्ता के लिए पहुंचे लोनिवि और पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता (ईई), कानूनगो, पटवारी को ग्रामीणों ने 24 घंटे तक बंधक बनाकर रखा।
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एसडीएम एनएस नबियाल भी आठ किमी पैदल चलकर शुक्रवार आधी रात को फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे लेकिन आंदोलनकारियों ने लिखित आश्वासन के बगैर बंधक बनाए अधिकारियों को छोड़ने से मना कर दिया। शनिवार को विधायक सुरेंद्र जीना गड़कोट पहुंचे और उनके लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीण बमुश्किल आंदोलन खत्म करने पर राजी हुए।
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पैसिया-गड़कोट और थला-भीताकोट मार्गों के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का गड़कोट में पिछले पांच दिन से आंदोलन चल रहा है। पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता विजय कुमार, लोनिवि रानीखेत के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार, कानूनगो मनोरथ लखचौरा, पटवारी जगमोहन शाह शुक्रवार को आंदोलनकारियों से वार्ता करने पहुंचे थे लेकिन ग्रामीणों ने सभी को पंचायत घर में बंधक बना लिया।
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अधिकारियों को बंधक बनाने की सूचना मिलने पर प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एसडीएम एनएस नबियाल शुक्रवार आधी रात को पुलिस फोर्स साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से वार्ता करके समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने लिखित आश्वासन के बगैर अधिकारियों को छोड़ने से मना कर दिया।
एसडीएम भी पूरी रात आंदोलनकारियों के साथ मौके पर बैठे रहे। उसके बाद शनिवार सुबह क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र सिंह जीना मौके के लिए रवाना हुए और वह दोपहर बाद गड़कोट पहुंचे। लंबी वार्ता के बाद विधायक ने लिखित आश्वासन दिया कि 10 अप्रैल तक दोनों सड़कों के लिए टेंडर जारी हो जाएंगे और अगर किसी कारण से टेंडर नहीं हुए तो विधायक जीना खुद अपने प्रयासों से जेसीबी लगाकर सड़क का निर्माण शुरू करेंगे।
विधायक से यह लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने बंधक अधिकारियों को छोड़ दिया और आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। वहां जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत, प्रधान सरोज सिंह, कमला देवी, दयाकिशन, विमला देवी, नंदन सिंह, कुंवर राम, आनंद राम, आनंदी देवी, गोपाल सिंह, देवकी देवी, गोपाल सिंह, जगत सिंह, अनीता देवी, अजय पाल सिंह, खुशाल सिंह, चंद्रा देवी, खुशाल सिंह, चंद्रा देवी, सरोप सिंह, सुरेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, मनोहर सिंह, प्रताप सिंह, मंगल सिंह आदि मौजूद थे।