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राज्य आंदोलनकारी डॉ. बिष्ट के योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 10:21 PM IST
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Dr. Bisht's contribution should be included in the school syllbus
अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी रहे उत्तराखंड लोक वाहिनी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष स्व. डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट की द्वितीय पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में ‘हिमालय का पारिस्थितिक तंत्र और चार धाम परियोजना’ विषय पर आयोजित वेबिनार में डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट जैसे राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की गई। कुंदन रावत के इस प्रस्ताव का सभी ने समर्थन किया।
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मुख्य वक्ता भूगर्भशास्त्री डॉ. नवीन जुयाल ने कहा कि हिमालय की भौगोलिक परिस्थिति और चार धाम परियोजना में हिमालय और उत्तराखंड के जंगलों का जानबूझ कर अप्राकृतिक रूप से दोहन किया जा रहा है। 2004, 2010 और 2013 में प्रमुख आपदाओं से नसीहत लेने की जरूरत है। इन इलाकों की सीमाएं धर्म स्थलों के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास में बाधक हैं। राज्य में हाल ही में हुए भूस्खलन से एक बार फिर साबित हुआ है कि पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र में निर्माण करना जोखिम भरा है।
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जयमित्र बिष्ट ने नवीन जुयाल का समर्थन किया। उन्होंने बताया की किस तरह खैरना हाईवे चौड़ीकरण के नाम पर जंगलों का दोहन कर पर्यावरण को भारी नुकसान पंहुचा। तकनीकी संचालन अजय मित्र बिष्ट, अजय सिंह मेहता ने किया।
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इस मौके पर डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट समेत स्वामी अग्निवेश, त्रेपन सिंह चौहान, हीरा सिंह राणा, पुरुषोत्तम असनोढ़ा, सुरेंद्र पुंडीर सहित कोरोना काल में मारे गए श्रमिकों को श्रद्धाजलि दी गई। अध्यक्षता राजीव लोचन साह ने और संचालन डॉ. शेखर पाठक ने किया। यहां कुंदन रावत, रवि चोपड़ा, चंदन सिंह घुघत्याल, डॉ. एसपी सती, डॉ. उमा भट्ट, तारा चंद्र त्रिपाठी, विनोद पांडे, डॉ. बीआर पंत, गिरजा पाठक, जगत रौतेला, डॉ. दिवा भट्ट, प्रफुल्ल पुरोहित, प्रेम पिरम, गंगा असनोरा, डॉ. स्वप्निल श्रीवास्तव, डी के जोशी, कैलाश तिवारी आदि मौजूद थे।
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