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डोल आश्रम में होगा विशाल श्रीयंत्र स्थापित

Mon, 05 Mar 2018 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Mon, 05 Mar 2018 10:44 PM IST
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Dol ashram will be installed big shiriyantra
लमगड़ा ब्लॉक में स्थित डोल आश्रम। - फोटो : अमर उजाला

 आध्यात्मिक और साधना केंद्र के रूप में विकसित श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास कनरा-डोल (डोल आश्रम) में 126 फुट ऊंचे और 150 मीटर व्यास के श्रीपीठम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इस पीठ में अष्ट धातु से निर्मित डेढ़ टन वजन के साढ़े तीन फुट ऊंचे श्रीयंत्र की स्थापना अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में होगी। न्यास के पदाधिकारियों का दावा है कि विश्व का सबसे बड़ा और सबसे भारी श्रीयंत्र यहां स्थापित होगा। श्रीपीठम में एक साथ पांच सौ लोग ध्यान कर सकेंगे। डोल आश्रम में बाबा कल्याण दास ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। 

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उन्होंने बताया कि श्रीपीठम का निर्माण कार्य 2012 से प्रारंभ हुआ, जो कि अंतिम चरण में है। 18 अप्रैल से श्रीपीठम में श्रीयंत्र स्थापना के अनुष्ठान प्रारंभ होकर 29 अप्रैल तक चलेेंगे। उन्होंने बताया कि श्रीयंत्र स्थापना कार्यक्रम में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर, दक्षिण भारत समेत विदेश से काफी संख्या में साधक पहुंचेंगे। जिनके रहने और भोजन आदि की व्यवस्था न्यास द्वारा की जाएगी। श्रीपीठम में श्रीयंत्र स्थापना होने के बाद देश-विदेश से साधक यहां ध्यान के लिए आएंगे। 
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बाबा कल्याणदास ने बताया कि न्यास जन कल्याण के कार्यों को बढ़ावा दे रहा है। जल्द ही न्यास द्वारा डिस्पेंसरी खोली जाएगी। फिलहाल न्यास में काशी मेडिकल विवि से सेवानिवृत्त डॉ. मजरी देवी स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। न्यास में गंभीर रोगियों के लिए एक एंबुलेंस उपलब्ध है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए जल्द ही एक छोटी एंबुलेंस भी न्यास उपलब्ध कराएगा, ताकि गंभीर रोगियों को एंबुलेंस से अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। 
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उन्होंने कहा कि संस्कृत देवभाषा होने के साथ ही भारतीय संस्कृति की रीढ है और जीवन का आधार है। आश्रम में बारहवीं तक संचालित संस्कृत विद्यालय को पब्लिक स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। 85 बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। कंप्यूटर और अंग्रेजी का भी अध्यापन कराया जाता है, ताकि वह किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहें। लंदन, यूरोप, अमेरिका और जर्मनी में भी संस्कृत के महत्व को समझा है। जर्मनी में तो काफी समय पहले से ही संस्कृत विवि स्थापित है। जहां भारत से भी विद्यार्थी पीएचडी करने जाते हैं। पत्रकार वार्ता में जागेश्वर के विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, तारा चंद्र जोशी आदि भी मौजूद थे। 

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