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नेतृत्व परिवर्तन होते ही परवान चढ़ने लगी नए जिलों की उम्मीद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी होते ही रानीखेतवासियों की जिले की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगती हैं। यह सिलसिला राज्य गठन के बाद से ही चल रहा है।
प्रदेश में 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन रानीखेत जिला अस्तित्व में नहीं आ सका है। वर्ष 2011 में चार जिलों की घोषणा राजनीतिक स्टंट बनकर रह गई। अब पुष्कर सिंह धामी सूबे के नए मुख्यमंत्री बने हैं, तो लोगों की उम्मीद है कि पूर्व घोषित जिलों को वह अस्तित्व में लाएंगे।
राज्य बनने के बाद से छोटी प्रशासनिक इकाइयों का गठन नहीं हो सका है। वर्ष 2011 में रानीखेत, कोटद्वार, यमुनोत्री और डीडीहाट जिलों की घोषणा के बाद आस जगी थी, लेकिन से घोषणाएं भी हवाई साबित हुईं।
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वर्ष 2012 और 2014 की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री बने विजय बहुगुणा और हरीश रावत से भी संयुक्त जिला कमेटी के पदाधिकारियों ने कई बार गुहार लगाकर छोटी प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर जोर दिया, लेकिन हाथ खाली रहे।
वर्ष 2017 में प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार आई। सरकार के पहले मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष भी कई बार मांग उठाई।
रानीखेत के लोगों ने सीएम के रानीखेत दौरे पर उनसे मुलाकात कर रानीखेत को जिला और नगर पालिका के मुद्दे को लेकर ज्ञापन सौंपे।
आश्वासन मिला पर अमल नहीं हुआ। मार्च 2021 में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से जिलों के गठन की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें भी चौथे महीने में ही इस्तीफा देना पड़ा।
मूल गांव डीडीहाट वालों की पीड़ा समझेंगे नए सीएम
रानीखेत (संवाद)। जिला बनाओ संघर्ष समिति के डीएन बड़ौला का कहना है कि नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मूलरूप से डीडीहाट के मूलवासी हैं, वह लोगों की पीड़ा से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लिहाजा वह जिलों को जरूर अस्तित्व में लाएंगे।
छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी का कहना है कि पिछले दिनों रानीखेत क्षेत्र में एक शादी समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात हुई।
जिलों के गठन को उन्होंने जरूरी भी बताया था और उन्हीं के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलने की बात पर उन्होंने सहमति जताई थी, वह जिलों के लिए सजग भी दिखे, अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे पूरी उम्मीद है।
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प्रदेश में 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन रानीखेत जिला अस्तित्व में नहीं आ सका है। वर्ष 2011 में चार जिलों की घोषणा राजनीतिक स्टंट बनकर रह गई। अब पुष्कर सिंह धामी सूबे के नए मुख्यमंत्री बने हैं, तो लोगों की उम्मीद है कि पूर्व घोषित जिलों को वह अस्तित्व में लाएंगे।
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राज्य बनने के बाद से छोटी प्रशासनिक इकाइयों का गठन नहीं हो सका है। वर्ष 2011 में रानीखेत, कोटद्वार, यमुनोत्री और डीडीहाट जिलों की घोषणा के बाद आस जगी थी, लेकिन से घोषणाएं भी हवाई साबित हुईं।
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वर्ष 2012 और 2014 की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री बने विजय बहुगुणा और हरीश रावत से भी संयुक्त जिला कमेटी के पदाधिकारियों ने कई बार गुहार लगाकर छोटी प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर जोर दिया, लेकिन हाथ खाली रहे।
वर्ष 2017 में प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार आई। सरकार के पहले मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष भी कई बार मांग उठाई।
रानीखेत के लोगों ने सीएम के रानीखेत दौरे पर उनसे मुलाकात कर रानीखेत को जिला और नगर पालिका के मुद्दे को लेकर ज्ञापन सौंपे।
आश्वासन मिला पर अमल नहीं हुआ। मार्च 2021 में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से जिलों के गठन की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें भी चौथे महीने में ही इस्तीफा देना पड़ा।
मूल गांव डीडीहाट वालों की पीड़ा समझेंगे नए सीएम
रानीखेत (संवाद)। जिला बनाओ संघर्ष समिति के डीएन बड़ौला का कहना है कि नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मूलरूप से डीडीहाट के मूलवासी हैं, वह लोगों की पीड़ा से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लिहाजा वह जिलों को जरूर अस्तित्व में लाएंगे।
छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी का कहना है कि पिछले दिनों रानीखेत क्षेत्र में एक शादी समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात हुई।
जिलों के गठन को उन्होंने जरूरी भी बताया था और उन्हीं के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलने की बात पर उन्होंने सहमति जताई थी, वह जिलों के लिए सजग भी दिखे, अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे पूरी उम्मीद है।