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खनन से कोसी पर मडरा रहा खतरा
ब्यूरो/ अल्मोड़ा
Updated Tue, 20 Jan 2015 11:41 PM IST
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निर्मल कोसी अभियान के तहत कांटली में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि परंपरागत प्राकृतिक जल स्रोतों की अनदेखी और नदियों में हो रहे बेतरतीब खनन के कारण कोसी नदी का अस्तित्व खतरे में है।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ताकुला के ब्लाक प्रमुख दीपक बोरा ने नदियों के उद्गम स्थलों को सदानीरा रखने और चौड़ी पत्तीदार पौधों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों में बरसाती पानी को खाल-खंतियों, इंफिल्टेशन टैंकों और छोटी-छोटी नालियों के माध्यम से संचय करने के लिए प्रभावी कार्य योजना बनाकर लागू की जानी चाहिए।
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उन्होंने कोसी और अन्य नदियों को भावी पीढ़ी के लिए धरोहर के रूप में सहेज कर रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक पत्रकार नवीन बिष्ट ने कहा कि पहाड़ों में भूमिगत जल भंडार तेजी से घट रहा है।
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इस मौके पर डा. दीपक पंत, गणेश भट्ट, कृष्णा कांडपाल, कुंवर भाकुनी, बौरारो विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष दिनेश जोशी, प्रधान गिरीश कांडपाल, पंकज नेगी, शुभम पंत, महेश गिरी गोस्वामी ने विचार रखे। कार्यक्रम में पनी राम, चंद्रशेखर कांडपाल, किशोर भट्ट, अशोक कांडपाल, नंद राम, धनुली देवी, बसंती देवी, हिरूली देवी, चना देवी, गोपाल गिरी आदि मौजूद थे। तय हुआ कि अगले माह कोसी के उद्गम स्थल कांटली में स्वच्छता अभियान चलाने के साथ ही खाल खंतिया खोदे जाएंगे।