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Almora News: देघाट चैत्राष्टमी मेले में उमड़ी भक्तों की भीड़
Thu, 26 Mar 2026 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:31 PM IST
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स्याल्दे (अल्मोड़ा)। देघाट में प्रसिद्ध चैत्राष्टमी मेले की धूम मची रही। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। सुबह से ही मंदिर में माता के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी थी। मेले में विभिन्न गांवों के लोग माता का डोला लेकर ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर परिसर में पहुंचे। माता के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।
देघाट के प्रसिद्ध चैत्राष्टमी मेले में दूर-दूर से लोग पहुंचे। मंदिर समिति की ओर से प्रथम नवरात्र से कराई जा रही भागवत कथा भी जारी रही। मेले में बाहर से आए व्यापारियों ने अपनी दुकानें सजाईं। लोग मेले में जमकर खरीदारी करते नजर आए। मेले में पुलिस की ओर से सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे।
मेले में नहीं दिखे लकड़ी के कृषि यंत्र
मेले में लोग अपनी जमा पूंजी से कृषि यंत्रों सहित घर के जरूरी सामानों की खरीदारी करने पहुंचते थे लेकिन इस बार मेले में कृषि यंत्र जैसे - हल, दनेला, पाटा सहित कुल्हाड़ी, कुदाल, दरांती के हत्थे नहीं दिखाई दिए। जो पूर्व के मेलों में व्यापारी लेकर आते थे। वर्तमान के मशीनी युग में ये यंत्र अब मेलों में देखने को नहीं मिल रहे हैं।
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नहीं हुई पशु बलि, माता का ढोला लेकर पहुंचे लोग
इस बार भी चेत्राष्ठमी मेला पिछले वर्ष की भांति बिना पशुबलि के संपन्न हुआ। पशुओं के स्थान पर क्षेत्र के सिरमोली, बबलिया, गोलना, भरसोली, बसनल गांव आदि से ग्रामीण माता के डोले के साथ जयकारा लगाते हुए पहुंचे थे।
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मेले मेंं पलायन का दिखा असर
देघाट के इस चेत्राष्ठमी मेले के दौरान मेला परिसर में कभी कुमाऊं और गड़वाल क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते थे। मेला परिसर लोगों से खचाखच भरा रहता था लेकिन बीते कुछ समय से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहे पलायन से मेले का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आया। मेले में करीब 10 हजार मेलार्थी से भी कम लोग पहुंचे।
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देघाट के प्रसिद्ध चैत्राष्टमी मेले में दूर-दूर से लोग पहुंचे। मंदिर समिति की ओर से प्रथम नवरात्र से कराई जा रही भागवत कथा भी जारी रही। मेले में बाहर से आए व्यापारियों ने अपनी दुकानें सजाईं। लोग मेले में जमकर खरीदारी करते नजर आए। मेले में पुलिस की ओर से सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे।
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मेले में नहीं दिखे लकड़ी के कृषि यंत्र
मेले में लोग अपनी जमा पूंजी से कृषि यंत्रों सहित घर के जरूरी सामानों की खरीदारी करने पहुंचते थे लेकिन इस बार मेले में कृषि यंत्र जैसे - हल, दनेला, पाटा सहित कुल्हाड़ी, कुदाल, दरांती के हत्थे नहीं दिखाई दिए। जो पूर्व के मेलों में व्यापारी लेकर आते थे। वर्तमान के मशीनी युग में ये यंत्र अब मेलों में देखने को नहीं मिल रहे हैं।
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नहीं हुई पशु बलि, माता का ढोला लेकर पहुंचे लोग
इस बार भी चेत्राष्ठमी मेला पिछले वर्ष की भांति बिना पशुबलि के संपन्न हुआ। पशुओं के स्थान पर क्षेत्र के सिरमोली, बबलिया, गोलना, भरसोली, बसनल गांव आदि से ग्रामीण माता के डोले के साथ जयकारा लगाते हुए पहुंचे थे।
मेले मेंं पलायन का दिखा असर
देघाट के इस चेत्राष्ठमी मेले के दौरान मेला परिसर में कभी कुमाऊं और गड़वाल क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते थे। मेला परिसर लोगों से खचाखच भरा रहता था लेकिन बीते कुछ समय से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहे पलायन से मेले का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आया। मेले में करीब 10 हजार मेलार्थी से भी कम लोग पहुंचे।