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फसल सुरक्षा समिति बना लहलहाई फसल
ब्यूरो/अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Tue, 15 Dec 2015 12:16 AM IST
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वन्य जीवों और लावारिस पशुओं के आतंक के चलते जहां पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकार खेतों को बंजर छोड़ रहे हैं। वहीं सुदूरवर्ती गल्ली बस्यूरा और चिनौना के ग्रामीण एकजुट होकर अपनी फसलों को नुकसान से बचा रहे हैं।
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इसके लिए संयुक्त फसल सुरक्षा समिति बनाई गई है। समिति ने चौकीदार की भी नियुक्ति की है। ग्रामीणों की यह मुहिम रंग ला रही है।
वन्य और लावारिस जानवरों के आतंक के चलते रमणा न्याय पंचायत के चिनौना क्षेत्र में खेत बंजर हो गए। गांव से पलायन बढ़ने लगा। कहीं से भी मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर खेतों को बचाने का निर्णय लिया। इसके लिए फसल सुरक्षा समिति बनाई गई। खेतों की देखरेख के लिए चौकीदार नियुक्ति किया गया।
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गांव का प्रत्येक परिवार चौकीदार को 45 रुपये प्रतिमाह देता है। इस मुहिम के चलते ही आज अधिकांश खेत फसलों से लहलहा रहे हैं। तीन साल पूर्व तक ग्रामीणों को बोने के लिए बीज तक नहीं मिल पाता था, वर्तमान में यही ग्रामीण दूसरे गांवों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं।
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प्रधान गोपाल सिंह ने बताया कि सबसे अधिक लावारिस जानवरों का यहां आतंक है। लोग बाहर से जानवरों को लेकर यहां छोड़ जाते हैं। यही जानवर खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं। अब ग्रामीण स्वयं भी इन जानवरों को खदेड़ते हैं।
यहां माजरा, मडुवा, सरसों, मसूर जैसी पारंपरिक फसलें बोई गई हैं। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के कारण खेती बाड़ी छोड़ना ठीक नहीं है। कहीं से भी मदद नहीं मिलती तो स्वयं बीड़ा उठाना चाहिए।
लोक चेतना मंच के निदेशक और इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त जोगेंद्र बिष्ट का कहना है कि चिनौना और गल्ली बस्यूरा के ग्रामीणों ने अन्य ग्रामीणों को आइना दिखाने का काम किया है। इस मुहिम को जिंदा रखने के लिए ग्रामीणों का हर संभव सहयोग करना चाहिए। वह भी पूरा सहयोग करेंगे।