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पर्याप्त पानी मिलने की संभावना को झटका
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Fri, 23 Oct 2015 10:52 PM IST
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सरयू से अल्मोड़ा के लिए प्रस्तावित पेयजल योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को शासन स्तर से वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने से योजना अधर में लटक गई है। धन नहीं मिलने से करीब दो अरब की इस योजना में अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। इससे अल्मोड़ावासियों को पर्याप्त पानी मिलने की संभावना को झटका लगा है।
अल्मोड़ा नगर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल संकट रहता है। पूर्व में कोसी और अन्य क्षेत्रों से बनी पेयजल योजनाओं से मांग के अनुरूप पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वर्षों पूर्व से सरयू-सेराघाट-अल्मोड़ा पेयजल योजना की मांग उठते रही है। पेयजल निगम द्वितीय निर्माण शाखा ने योजना का 2.03 अरब का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। योजना की अधिक लागत को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने गत 17 दिसंबर 2013 को स्पेशल प्लान में इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी। केंद्र ने कटौती कर योजना की लागत 168.30 करोड़ सीमित कर 15 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं।
जल निगम द्वितीय निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एन लाल ने बताया कि योजना का विस्तृत आंगणन तैयार कर 15 सितंबर 2014 को उत्तराखंड सरकार को भेजा था। सौ किमी लंबी इस योजना से नगर को 10.41 एमएलडी पानी मिलेगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों को भी पेयजल आपूर्ति होगी, लेकिन अब तक योजना को राज्य सरकार के स्तर से वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण योजना का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
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अल्मोड़ा नगर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल संकट रहता है। पूर्व में कोसी और अन्य क्षेत्रों से बनी पेयजल योजनाओं से मांग के अनुरूप पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वर्षों पूर्व से सरयू-सेराघाट-अल्मोड़ा पेयजल योजना की मांग उठते रही है। पेयजल निगम द्वितीय निर्माण शाखा ने योजना का 2.03 अरब का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। योजना की अधिक लागत को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने गत 17 दिसंबर 2013 को स्पेशल प्लान में इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी। केंद्र ने कटौती कर योजना की लागत 168.30 करोड़ सीमित कर 15 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं।
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जल निगम द्वितीय निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एन लाल ने बताया कि योजना का विस्तृत आंगणन तैयार कर 15 सितंबर 2014 को उत्तराखंड सरकार को भेजा था। सौ किमी लंबी इस योजना से नगर को 10.41 एमएलडी पानी मिलेगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों को भी पेयजल आपूर्ति होगी, लेकिन अब तक योजना को राज्य सरकार के स्तर से वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण योजना का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
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