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Almora News: पहाड़ चढ़ और उतर रहा नशा
Fri, 03 Nov 2023 12:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 03 Nov 2023 12:32 AM IST
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अल्मोड़ा। नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे तमाम अभियान के बाद भी नशे के सामान की तस्करी और इसका प्रयोग करने वालों पर लगाम नहीं लग पा रही है। हालात ये हैं कि नशे का सामान बेखौफ पहाड़ चढ़ भी रहा है और यहां से मैदान उतर भी रहा है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा में बीते एक साल में 5.219 किलो चरस बरामद हुई। इसे तस्कर पहाड़ से मैदान में उतारने की फिराक में थे। चार किलो से अधिक अफीम और 400 ग्राम से अधिक स्मैक को तस्करों ने मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ पहुंचाया है।
पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जिले में 5.219 किलो चरस, 272.661 किलो गांजा पुलिस ने बरामद किया। नशे के इस सामान को तस्कर जिले से मैदानी क्षेत्रों में पहुंचाने की फिराक में थे। 417.810 ग्राम स्मैक, 2.600 किलो अफीम बरामद हुई। इसे तस्करों ने मैदानी क्षेत्रों से यहां पहुंचाया और उनका मकसद इसे यहां के युवाओं को बेचकर ऊंचा मुनाफा कमाना था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि नशा के सामान के तस्करों का जाल मैदान से पहाड़ तक फैला है। वे नशे के इस सामान को मैदान से पहाड़ चढ़ा भी रहे हैं और पहाड़ से मैदान उतार भी रहे हैं। ये सभी मामले पुलिस की पकड़ में आए हैं। इससे उलट पुलिस यह खुद भी मानती है कि कई बार नशे के सौदागर पकड़ में नहीं आ पाते और वे नशे के सामान को पहाड़ चढ़ाने और मैदान उतारने में कामयाब भी हो जाते हैं। पुलिस ऐसे मामलों की संख्या न्यून बता रही है। संवाद
पुड़िया बनाकर युवाओं को बेची जाती है स्मैक
अल्मोड़ा। पुलिस के मुताबिक स्मैक तस्करी के अधिकतर मामलों में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वे जिले के युवाओं को इसकी छोटी पुड़िया बनाकर बेचने की फिराक में थे। अधिकतर तस्कर खुद भी स्मैक के लती थे। मकसद यह था कि खुद की जरूरत पूरी हो और अपनी लत को पूरा करने के लिए जरूरत के मुताबिक पैसों की व्यवस्था करने को ऊंचे दामों में इसे अन्य युवाओं को बेचा जाए।
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बाइक तस्करी का आसान तरीका
अल्मोड़ा। स्मैक, चरस तस्करी के पकड़े गए अधिकतर मामलों में तस्करों ने बाइक का प्रयोग किया। पुलिस के मुताबिक तस्कर स्मैक और चरस को बाइक और स्कूटी में छुपाकर लाते और ले जा रहे हैं। सटीक जानकारी होने पर ही तस्करी में लिप्त आरोपियों की बाइक की जांच हुई है। इससे साफ है कि स्मैक तस्करी में लिप्त आरोपियों की बगैर सटीक जानकारी मिले बगैर पुलिस के लिए उन तक पहुंचना चुनौती है।
देवभूमि को ड्रग फ्री बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। नशे के सामान की तस्करी करने वालों की लगातार धरपकड़ की जा रही है। निश्चित तौर पर बीते कुछ समय से नशे के सामान की तस्करी के मामले कम हुए हैं। 2025 तक हर हाल में जिले को ड्रग फ्री बनाया जाएगा।
रामचंद्र राजगुरु, एसएसपी, अल्मोड़ा।
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पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जिले में 5.219 किलो चरस, 272.661 किलो गांजा पुलिस ने बरामद किया। नशे के इस सामान को तस्कर जिले से मैदानी क्षेत्रों में पहुंचाने की फिराक में थे। 417.810 ग्राम स्मैक, 2.600 किलो अफीम बरामद हुई। इसे तस्करों ने मैदानी क्षेत्रों से यहां पहुंचाया और उनका मकसद इसे यहां के युवाओं को बेचकर ऊंचा मुनाफा कमाना था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि नशा के सामान के तस्करों का जाल मैदान से पहाड़ तक फैला है। वे नशे के इस सामान को मैदान से पहाड़ चढ़ा भी रहे हैं और पहाड़ से मैदान उतार भी रहे हैं। ये सभी मामले पुलिस की पकड़ में आए हैं। इससे उलट पुलिस यह खुद भी मानती है कि कई बार नशे के सौदागर पकड़ में नहीं आ पाते और वे नशे के सामान को पहाड़ चढ़ाने और मैदान उतारने में कामयाब भी हो जाते हैं। पुलिस ऐसे मामलों की संख्या न्यून बता रही है। संवाद
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पुड़िया बनाकर युवाओं को बेची जाती है स्मैक
अल्मोड़ा। पुलिस के मुताबिक स्मैक तस्करी के अधिकतर मामलों में पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वे जिले के युवाओं को इसकी छोटी पुड़िया बनाकर बेचने की फिराक में थे। अधिकतर तस्कर खुद भी स्मैक के लती थे। मकसद यह था कि खुद की जरूरत पूरी हो और अपनी लत को पूरा करने के लिए जरूरत के मुताबिक पैसों की व्यवस्था करने को ऊंचे दामों में इसे अन्य युवाओं को बेचा जाए।
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बाइक तस्करी का आसान तरीका
अल्मोड़ा। स्मैक, चरस तस्करी के पकड़े गए अधिकतर मामलों में तस्करों ने बाइक का प्रयोग किया। पुलिस के मुताबिक तस्कर स्मैक और चरस को बाइक और स्कूटी में छुपाकर लाते और ले जा रहे हैं। सटीक जानकारी होने पर ही तस्करी में लिप्त आरोपियों की बाइक की जांच हुई है। इससे साफ है कि स्मैक तस्करी में लिप्त आरोपियों की बगैर सटीक जानकारी मिले बगैर पुलिस के लिए उन तक पहुंचना चुनौती है।
देवभूमि को ड्रग फ्री बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। नशे के सामान की तस्करी करने वालों की लगातार धरपकड़ की जा रही है। निश्चित तौर पर बीते कुछ समय से नशे के सामान की तस्करी के मामले कम हुए हैं। 2025 तक हर हाल में जिले को ड्रग फ्री बनाया जाएगा।
रामचंद्र राजगुरु, एसएसपी, अल्मोड़ा।