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स्कूल की छत और दीवारों पर दरारें, बच्चों का जीवन भगवान सहारे

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jul 2021 12:30 AM IST
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cracks on the ceiling and walls of the school
सल्ट तहसील के अंतर्गत खस्ताहाल प्राथमिक स्कूल भ्याड़ी का भवन। (विज्ञप्ति) - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। कोरोना के कहर के कारण बीते डेढ़ साल से स्कूल बंद थे। बावजूद इसके सरकार और शिक्षा विभाग जीर्णशीर्ण स्कूल भवनों की मरम्मत नहीं कर पाया है। जिले के 1695 राजकीय स्कूलों में से 189 स्कूलों के भवन और कक्ष जीर्णशीर्ण स्थिति में हैं। बारिश होने पर कई स्कूल भवनों की छतें टपकती हैं। कई भवनों का प्लास्टर तक उखड़ा हुआ है। छत, दीवारों पर दरारें पड़ी हैं। जीर्ण-शीर्ण स्कूल भवनों से वहां पढ़ने वाले बच्चों को खतरा बना रहता है। बरसात में इन स्कूलों के बच्चों को स्कूल के दूसरे कक्ष या आसपास स्थित पंचायत घर, आंगनबाड़ी केंद्रों में तक शिफ्ट करना पड़ता है।
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जिले में 166 राजकीय इंटर कालेज और 97 हाईस्कूल हैं। इनमें से 55 स्कूलों की कक्षाएं बदहाल और जीर्णशीर्ण हैं। बारिश होने पर स्कूलों की छत टपकती हैं। इस दौरान बच्चों को दूसरी कक्षाओं में बैठाना पड़ता है, जिससे दूसरी कक्षाओं के छात्र-छात्राओं की भी पढ़ाई में भी व्यवधान आना स्वाभाविक है। जिला मुख्यालय में शिक्षा विभाग के कार्यालय के समीप राजकीय इंटर कालेज अल्मोड़ा के जूनियर ब्लॉक के भवन की दीवार वर्ष 2010 की आई आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे विभाग अब तक ठीक नहीं करा पाया है।
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प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों की स्थिति तो और भी खराब है। 1263 प्राथमिक स्कूल और 169 जूनियर हाईस्कूलों में से 134 स्कूल भवन खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। लंबे समय बाद भी इन जीर्ण शीर्ण स्कूल भवनों के स्थान पर न तो नया स्कूल भवन बन पाया है और न ही ऐसे स्कूल भवनों की विभाग मरम्मत कर सका है। खस्ताहाल स्कूल भवनों से खासकर बरसात के मौसम में छात्र-छात्राओं को खतरा बना रहता है।
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स्कूल भवनों के सुधारीकरण और नए भवन बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे गए हैं, लेकिन बजट स्वीकृत नहीं होने से स्कूल भवनों की दशा नहीं सुधर पा रही है। - एचबी चंद, मुख्य शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा।
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