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प्रेरणादायी है जिलाधिकारी सुमन की सफलता की कहानी

Wed, 25 Feb 2015 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा। Updated Wed, 25 Feb 2015 11:06 PM IST
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Collector's success story is inspirational Suman
अगर इंसान जिंदगी में कुछ हासिल करने की ठान ले तो बड़ी से बड़ी कठिनाई उसकी राह नहीं रोक सकती, बस इसके लिए इरादा पक्का और हौसले बुलंद होने चाहिए। अल्मोड़ा के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन की सफलता की कहानी भी आज के युवाओं को प्रेरणा दे सकती है। विनोद कुमार सुमन इंटरमीडिएट करने के बाद अपने ही दम पर मंजिल पाने के जुनून में भदोही (उप्र) से अपने माता-पिता को छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल निकल आए और वहां कई महीने मजदूरी करके गुजारा किया। श्रीनगर में  कठिन संघर्ष करके ग्रेजुएशन किया और आखिरकार पीसीएस की परीक्षा में सफल हुए।
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भदोही निवासी विनोद कुमार सुमन ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई विभूति नारायण राजकीय इंटर कालेज ज्ञानपुर (भदोही) से की। स्नातक में परिजनों ने इलाहाबाद में प्रवेश दिलाया लेकिन उनका मन नहीं लगा। वह सोचते थे कि वहां रहकर प्रशासनिक सेवा में सफल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने पढ़ाई के लिए बाहर जाने की इच्छा जताई लेकिन घर के लोग राजी नहीं हुए। इस पर उन्होंने अपने ही दम पर कुछ करने की ठान ली। उन्होंने इतनी दूर निकलने का मन बना लिया जहां उन्हें कोई पहचान ही न सके। किसी बताए बिना जुलाई 1889 में श्रीनगर गढ़वाल भाग आए।
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सुमन बताते हैं कि तब उनके पास सिर्फ शरीर के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं था। श्रीनगर आकर उन्होंने कई दिनों तक मजदूरी की और करीब एक माह तक एक चादर और  बोरे के सहारे एक मंदिर के बरामदे में रातें बिताई। इस दौरान मजदूरी से मिले पैसों से कुछ भी खा लेते थे। फिर सितंबर 1989 में उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल विवि में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश ले लिया और गणित, सांख्यिकी और इतिहास विषय लिए। कुछ दिनों बाद वहां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। गणित में अच्छे थे इसलिए कुछ दिनों में ट्यूशन पढ़ने वालों की संख्या काफी हो गई। इसके बाद आर्थिक संकट काफी कम हो गया और एक कमरा भी किराए में ले लिया। वह बताते हैं कि करीब 15 माह बाद उनके घर पर कहीं से खबर पहुंच गई कि बेटा जिंदा है। उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल से 1992 में प्रथम श्रेणी में बीए पास किया। फिर पिताजी के कहने पर इलाहाबाद आ गए। इलाहाबाद आकर प्राचीन इतिहास विषय में एमए, 1995 में लोक प्रशासन में डिप्लोमा प्राप्त किया। फिर महालेखाकार ऑफिस में  लेखाकार की सर्विस लग गई। बाद में माताजी को कैंसर की बीमारी होने के कारण प्रशासनिक सेवा की तैयारियां प्रभावित हुई। आखिरकार उन्होंने 1997 में पीसीएस की परीक्षा में सफलता हासिल की। उन्हें उत्तराखंड में 2008 में आईएएस का कैडर मिला। वह देहरादून में एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के अलावा कई जिलों में एडीएम गन्ना आयुक्त, निदेशक समाज कल्याण सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पिछले करीब एक साल से अल्मोड़ा के जिलाधिकारी के पद पर हैं।
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घर से निकलते वक्त ही राह तय कर ली थी
अल्मोड़ा। विनोद कुमार सुमन बताते हैं कि वह कुछ बनने के लिए घर से निकले थे। उन्होंने इंटरमीडिएट करने के बाद ही तय कर लिया था कि एक न एक दिन प्रशासनिक सेवा में सफल होकर दिखाएंगे। वह कहते हैं कि अगर दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी कठिनाई इंसान को नहीं डिगा सकती। 1999 में उनका विवाह हुआ। उनकी एक बेटी है जो देहरादून में छठी कक्षा में पढ़ती है।  
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