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Almora News: मोबाइल, कंप्यूटर की लत से बच्चों की आंखें हो रही है कमजोर
Wed, 28 Aug 2024 01:27 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 28 Aug 2024 01:27 AM IST
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अल्मोड़ा। जिले में मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों में आंखों की समस्या बढ़ रही है। बच्चे आंखों में दर्द, धुंधलापन, सिर सर्द आदि की समस्याओं से जूझ रहे हैं।
जिला अस्पताल और बेस में रोजाना नर कमजोर होने के 15 से 20 मामले पहुंच रहे हैं। मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी आदि का अधिक इस्तेमाल करने पर सीधा असर उनकी आंखों पर पड़ता है। इसमें मोतियाबिंद, अंधापन की आशंका बढ़ जाती है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन मकवाल ने बताया कि मोबाइल और टीवी लगातार देखने से बच्चों में आंखों की समस्या पैदा हो रही है। बताया कि नजर कमजोर में आंखों में दर्द, सिर दर्द, धुंधलापन आदि के लक्षण होते है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. वीना तेजन ने बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी को अधिक देखने वाले बच्चे एडीएचडी रोग से ग्रस्त हो जाते हैं। इनमें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना, आत्म-नियंत्रण, एकाकीपन, खानपान आदि कम होने के लक्षण होते हैं। बताया कि इससे बचाव का एक मात्र इलाज अभिभावकों की निगरानी और मित्रवत व्यवहार है।
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बचाव
- आंखों से स्क्रीन की दूरी 25 सेंटीमीटर से अधिक होनी चाहिए।
- खाने में पौष्टिक आहार ले।
-समय-समय पर आंखों का चेकअप कराते रहें।
-चश्मा जरूर पहनें।
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जिला अस्पताल और बेस में रोजाना नर कमजोर होने के 15 से 20 मामले पहुंच रहे हैं। मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी आदि का अधिक इस्तेमाल करने पर सीधा असर उनकी आंखों पर पड़ता है। इसमें मोतियाबिंद, अंधापन की आशंका बढ़ जाती है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन मकवाल ने बताया कि मोबाइल और टीवी लगातार देखने से बच्चों में आंखों की समस्या पैदा हो रही है। बताया कि नजर कमजोर में आंखों में दर्द, सिर दर्द, धुंधलापन आदि के लक्षण होते है।
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क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. वीना तेजन ने बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी को अधिक देखने वाले बच्चे एडीएचडी रोग से ग्रस्त हो जाते हैं। इनमें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना, आत्म-नियंत्रण, एकाकीपन, खानपान आदि कम होने के लक्षण होते हैं। बताया कि इससे बचाव का एक मात्र इलाज अभिभावकों की निगरानी और मित्रवत व्यवहार है।
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बचाव
- आंखों से स्क्रीन की दूरी 25 सेंटीमीटर से अधिक होनी चाहिए।
- खाने में पौष्टिक आहार ले।
-समय-समय पर आंखों का चेकअप कराते रहें।
-चश्मा जरूर पहनें।