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बच्चे की सही परवरिश नहीं तो शिशु सदन जाएगा

Sat, 02 May 2015 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Sat, 02 May 2015 12:37 AM IST
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Child's upbringing will not nursery

माता पिता की हरकतों के कारण पड़ोसी के घर में पल रहे ढाई साल के हर्षित को आखिरकार बाल कल्याण समिति ने उसकी वास्तविक मां को सौंप दिया है। हालांकि उसकी मां को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह अगले तीन साल तक हर तीन माह में बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करेगी और सही ढंग से परवरिश नहीं होने पर बच्चे को राजकीय शिशु सदन भेज दिया जाएगा।

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मालूम हो कि पिथौरागढ़ जिले के निवासी जीवन चंद्र भट्ट कुछ साल पहले अल्मोड़ा के दुगालखोला में अपनी पत्नी नीमा भट्ट और दो बच्चों के साथ किराए पर रहता था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी अपनी चार साल और एक साल के दो बच्चों को छोड़कर कहीं चली गई थी। पत्नी के वापस नहीं लौटने पर जीवन चंद्र भट्ट ने अपने एक साल के हर्षित को पड़ोसी नरेंद्र भोज को सौंप गया। जबकि चार साल के बेटे को वह अपने साथ ले गया। तब से नरेंद्र भोज और उनकी पत्नी इस बच्चे को पाल पोष रहे थे। बीते दिनों बच्चे की वास्तविक मांनीमा भट्ट ने  पुलिस में शिकायत करके अपने बेटे को दिलाने की मांग की।
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इसके बाद पुलिस की स्माइल टीम बच्चे को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रो. इला साह के पास लेकर आए। नीमा भट्ट का कहना था कि वह बच्चे की असली मां है इसलिए बच्चा उसे ही मिलना चाहिए। जबकि नरेंद्र भोज और उसकी पत्नी का कहना था कि बच्चे के पिता ने स्टांप पेपर में लिखकर बच्चा उन्हें सौंपा था और वह डेढ़ साल से उसका पालन पोषण कर रहे हैं। इसलिए बच्चा उन्हें ही दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रो. इला साह ने बच्चे को राजकीय शिशु सदन भेज दिया था। मालूम हो कि उस दिन बच्चा भी अपनी वास्तविक मां के साथ जाने को तैयार नहीं था।
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जांच पड़ताल के बाद बाल कल्याण समिति ने बच्चे को उसकी वास्तविक मां नीमा भट्ट को सौंप दिया है। समिति की अध्यक्ष प्रो. इला साह ने बताया कि नीमा भट्ट से शपथपत्र भी भरवाया गया है। जिसके मुताबिक उसे अगले तीन साल तक हर तीसरे माह बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करना होगा। अगर नीमा भट्ट बच्चे की ठीक से परवरिश करने में विफल रही तो उसे शिशु सदन में ही भेज दिया जाएगा। नीमा भट्ट को यह भी बता दिया गया है कि वह बच्चे को देखभाल आदि के लिए किसी को नहीं सौंप सकती है। 

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