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उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ तोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
Updated Fri, 27 Oct 2017 11:20 PM IST
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चौखुटिया में छठ पर्व पर रामगंगा के तट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र में बिहार के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला छठ पूजा पर्व धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाने के बाद व्रतधारी महिलाओं ने अपना व्रत तोड़ा। इससे पूर्व पूजा अर्चना की गई। तड़के सुबह से ही लोग रामगंगा के तट पर स्थित आयोजन स्थल में पहुंचने शुरू हो गए थे। रामगंगा के तट पर पिछले तीन दिनों से मनाया जा रहा छठ पूजा पर्व समृद्धि और खुशहाली के प्रतीक सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
इससे पूर्व छठ मैया की पूजा और परिक्रमा की गई। तत्पशचात सूर्य देव की पूजा कर उन्हें फल सहित तमाम पकवान चढ़ाए गए। स्नान आदि करने के बाद लोग घरों को रवाना हुए। घर पहुंचने के बाद महिलाओं ने गुनगुने पानी के साथ अदरक और गुड़ लेकर अपना व्रत तोड़ा। आयोजन स्थल पर सुबह से ही छठी मैया के भजनों व आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हो गया था।
समिति की ओर से अध्यक्ष अजय गुप्ता (सिलू), राजवंशी, वीरेंदर महतो, कृष्णा शर्मा, विजय शर्मा, ओमकुमार आदि ने सहयोग के लिए स्थानीय लोगों के साथ ही पुलिस प्रशासन का आभार जताया। कार्यक्रम में द्वाराहाट, जालली, कफड़ा, बाजन व नौबड़ा से भी बिहारी मूल के लोग पहुंचे थे।
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लकड़ी के चूल्हे में बनाया जाता है ठेकुआ
छठ पूजा संपन्न होने के बाद बिहार के मुख्य व्यंजन ठेकुआ का प्रसाद बांटा गया। ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं के आटे में घी व गुड़ मिलाकर उसे शुद्ध देशी घीं में तला जाता है। ठेकुआ लकड़ी से जलने वाले चूल्हे में ही बनाया जाता है। बनाने से पहले गंगाजल से चूल्हे का शुद्धिकरण किया जाता है। असल में ठेकुआ बनाने की विधि अपने यहां कथा आदि में प्रसाद के रूप में बनने वाले रोट व मोदक आदि की तरह ही है। दोनों में सिर्फ आकार में कुछ अंतर होता है।
छठ पूजा के बहाने हर हाथ को मिलता है काम
छठ पूजा में फल, फूल से लेकर बांस की डलिया, मिट्टी के दीपक, अन्न, विभिन्न प्रकार के औजार सहित तमाम चीजों की जरूरत पड़ती है। इसीलिए कहा जाता है कि छठ पूजा के बहाने किसान से लेकर मजदूर तक हर किसी को काम मिल जाता है। इस लिहाज से भी छठ पूजा को जन-जन का कल्याण करने वाला बताया गया है। पूजा में पीले कपड़ों का ज्यादा प्रयोग होता है। महिलाएं लाल सिंदूर के बजाए पीले अथवा बजरंग बली वाले सिंदूर का ही प्रयोग करती हैं। पीला सिंदूर उपलब्ध न होने पर लाल सिंदूर का उपयोग किया जाता है।
ठंडे पानी में घंटों खड़ी रहती हैं महिलाएं
छठ पूजा में व्रतधारी महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देने से पहले तड़के सुबह से ही नदी के ठंडे पानी में खड़े होकर घंटों आराधना करती हैं। सीमा और आशा देवी ने बताया कि वे तड़के तीन बजे नदी के तट पर आ गई थी। दोनों ने नदी के अंदर खड़े होकर शुक्रवार सुबह सवा सात बजे सूर्य निकलने तक आराधना की। कुछ अन्य महिलाएं भी दो से तीन घंटे तक इसी तरह खड़ी रही। 36 घंटे के व्रत के बावजूद छठी मैया की कृपा से महिलाओं के चेहरे पर किसी तरह की थकान नजर नहीं आ रही थी।
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इससे पूर्व छठ मैया की पूजा और परिक्रमा की गई। तत्पशचात सूर्य देव की पूजा कर उन्हें फल सहित तमाम पकवान चढ़ाए गए। स्नान आदि करने के बाद लोग घरों को रवाना हुए। घर पहुंचने के बाद महिलाओं ने गुनगुने पानी के साथ अदरक और गुड़ लेकर अपना व्रत तोड़ा। आयोजन स्थल पर सुबह से ही छठी मैया के भजनों व आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हो गया था।
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समिति की ओर से अध्यक्ष अजय गुप्ता (सिलू), राजवंशी, वीरेंदर महतो, कृष्णा शर्मा, विजय शर्मा, ओमकुमार आदि ने सहयोग के लिए स्थानीय लोगों के साथ ही पुलिस प्रशासन का आभार जताया। कार्यक्रम में द्वाराहाट, जालली, कफड़ा, बाजन व नौबड़ा से भी बिहारी मूल के लोग पहुंचे थे।
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लकड़ी के चूल्हे में बनाया जाता है ठेकुआ
छठ पूजा संपन्न होने के बाद बिहार के मुख्य व्यंजन ठेकुआ का प्रसाद बांटा गया। ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं के आटे में घी व गुड़ मिलाकर उसे शुद्ध देशी घीं में तला जाता है। ठेकुआ लकड़ी से जलने वाले चूल्हे में ही बनाया जाता है। बनाने से पहले गंगाजल से चूल्हे का शुद्धिकरण किया जाता है। असल में ठेकुआ बनाने की विधि अपने यहां कथा आदि में प्रसाद के रूप में बनने वाले रोट व मोदक आदि की तरह ही है। दोनों में सिर्फ आकार में कुछ अंतर होता है।
छठ पूजा के बहाने हर हाथ को मिलता है काम
छठ पूजा में फल, फूल से लेकर बांस की डलिया, मिट्टी के दीपक, अन्न, विभिन्न प्रकार के औजार सहित तमाम चीजों की जरूरत पड़ती है। इसीलिए कहा जाता है कि छठ पूजा के बहाने किसान से लेकर मजदूर तक हर किसी को काम मिल जाता है। इस लिहाज से भी छठ पूजा को जन-जन का कल्याण करने वाला बताया गया है। पूजा में पीले कपड़ों का ज्यादा प्रयोग होता है। महिलाएं लाल सिंदूर के बजाए पीले अथवा बजरंग बली वाले सिंदूर का ही प्रयोग करती हैं। पीला सिंदूर उपलब्ध न होने पर लाल सिंदूर का उपयोग किया जाता है।
ठंडे पानी में घंटों खड़ी रहती हैं महिलाएं
छठ पूजा में व्रतधारी महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देने से पहले तड़के सुबह से ही नदी के ठंडे पानी में खड़े होकर घंटों आराधना करती हैं। सीमा और आशा देवी ने बताया कि वे तड़के तीन बजे नदी के तट पर आ गई थी। दोनों ने नदी के अंदर खड़े होकर शुक्रवार सुबह सवा सात बजे सूर्य निकलने तक आराधना की। कुछ अन्य महिलाएं भी दो से तीन घंटे तक इसी तरह खड़ी रही। 36 घंटे के व्रत के बावजूद छठी मैया की कृपा से महिलाओं के चेहरे पर किसी तरह की थकान नजर नहीं आ रही थी।