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वित्तीय अनियमितताओं के दोषियों पर कस सकता है सीबीसीआईडी का शिकंजा
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अल्मोड़ा। नगरपालिका परिषद ने नगर में पुरानी लोकनाथ पंत धर्मशाला और टम्टा धर्मशाला को करीब 11 साल पहले तोड़ दिया था। इन धर्मशालाओं के निर्माण के लिए शासन से करीब 90 लाख रुपये मंजूर भी हुए थे पर यह राशि वित्तीय अनियमितताओं की भेंट चढ़ गई। एक पूर्व सभासद की याचिका में हाईकोर्ट नैनीताल ने पालिका बोर्ड के तत्कालीन जिम्मेदार लोगों को दोषी करार देते हुए सीबीसीआईडी को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
बताया गया है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीसीआईडी की जांच अंतिम चरण में है लेकिन आज तक धर्मशालाओं का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। लोगों ने दोनों धर्मशालाओं का शीघ्र निर्माण शुरू करने की मांग की है।
शासन ने 2008-09 में अल्मोड़ा की जीर्ण-शीर्ण हो चुकी लोकनाथ पंत धर्मशाला के पुनर्निर्माण के लिए करीब 53 लाख और टम्टा धर्मशाला के निर्माण के लिए लगभग 36 लाख रुपये मंजूर किए। इनके लिए क्रमश: 40 लाख और 27 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिए गए थे।
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नगरपालिका परिषद ने 2009 में पुरानी दोनों धर्मशालाओं को तोड़ दिया लेकिन उनके स्थान पर नई धर्मशालाओं का निर्माण लटक गया। पालिका के एक तत्कालीन सभासद एलके पंत ने इस मामले को लेकर लोकायुक्त में शिकायत करने के साथ ही बाद में हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर दी थी।
आरोप था कि तत्कालीन पालिका बोर्ड ने धर्मशालाओं के निर्माण के लिए मिली राशि को अन्य मदों पर खर्च कर दिया। हाईकोर्ट ने बीते वर्ष अपने फैसले में मामले की जांच कर रही सीबीसीआईडी से पालिका बोर्ड के तत्कालीन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में सीबीसीआईडी की जांच अंतिम चरण में है और भविष्य में दोषियों के खिलाफ एफआईआर और नियमानुसार अन्य कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ तत्कालीन पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को निराधार बताती रही हैं।
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बताया गया है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीसीआईडी की जांच अंतिम चरण में है लेकिन आज तक धर्मशालाओं का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। लोगों ने दोनों धर्मशालाओं का शीघ्र निर्माण शुरू करने की मांग की है।
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शासन ने 2008-09 में अल्मोड़ा की जीर्ण-शीर्ण हो चुकी लोकनाथ पंत धर्मशाला के पुनर्निर्माण के लिए करीब 53 लाख और टम्टा धर्मशाला के निर्माण के लिए लगभग 36 लाख रुपये मंजूर किए। इनके लिए क्रमश: 40 लाख और 27 लाख रुपये अवमुक्त भी कर दिए गए थे।
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नगरपालिका परिषद ने 2009 में पुरानी दोनों धर्मशालाओं को तोड़ दिया लेकिन उनके स्थान पर नई धर्मशालाओं का निर्माण लटक गया। पालिका के एक तत्कालीन सभासद एलके पंत ने इस मामले को लेकर लोकायुक्त में शिकायत करने के साथ ही बाद में हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर दी थी।
आरोप था कि तत्कालीन पालिका बोर्ड ने धर्मशालाओं के निर्माण के लिए मिली राशि को अन्य मदों पर खर्च कर दिया। हाईकोर्ट ने बीते वर्ष अपने फैसले में मामले की जांच कर रही सीबीसीआईडी से पालिका बोर्ड के तत्कालीन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में सीबीसीआईडी की जांच अंतिम चरण में है और भविष्य में दोषियों के खिलाफ एफआईआर और नियमानुसार अन्य कार्रवाई हो सकती है। दूसरी तरफ तत्कालीन पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को निराधार बताती रही हैं।