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प्रेक्षाध्यान चेतना, मन, अचेतन मन को नियंत्रित करता है: भास्कर
Sun, 21 Apr 2019 11:12 PM IST
दीपक नेगी
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Published by: दीपक नेगी
Updated Sun, 21 Apr 2019 11:12 PM IST
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में आयोजित कार्यशाला में योगाभ्यास करते प्रतिभागी।
- फोटो : amar ujala
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के योग शिक्षा विभाग की ओर से योग विभाग में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का चिकित्सकीय अनुप्रयोग विषय पर आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में आठवें दिन जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय लाडनू राजस्थान के विशेषज्ञ डॉ. अशोक भास्कर नेे कहा कि व्यक्ति के आध्यात्मिक तथा नैतिक विकास के लिए प्रेक्षाध्यान उपक्रम आवश्यक है। प्रेक्षाध्यान प्रयोग आत्म शुद्धि का उपक्रम है। प्रेक्षाध्यान चेतना, मन और अचेतन मन को नियंत्रित करता है।
उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, सहिष्णुता, धैर्य, भावनात्मक संतुलन के विकास के लिए यह अत्यंत मूल्यवान है। प्रेक्षाध्यान व्यक्ति की अनाशक्त चेतना को उजागर करता है। मनुष्य के जीवन में सात स्तर हैं। शरीर, श्वास, प्राण ऊर्जा, मस्तिष्क, भाव, आभामंडल, चेतना प्रेक्षाध्यान के माध्यम से निषेधक आभामंडल को विधेयक आभामंडल में रूपांतरित किया जा सकता है। यह व्यक्तित्व के परिवर्तन का कारक बनता है। प्रेक्षाध्यान चेतना, मन तथ अचेतन मन को नियंत्रित करता है। जिसके द्वारा हारमोंस को भी नियंत्रण में लाकर घृणा, क्रोध, ईर्ष्या आदि नकारात्मक भावों को प्रेम, विनम्रता में बदला जाता है। उन्होंने बताया कि कार्योत्सर्ग परानुंकणी नाड़ी तंत्र को सक्रिय बनाता है।
इस मौके पर हुई योग चैंपियनशिप में पीजी कालेज खटीमा, पीजी कालेज काशीपुर, एसएसजे परिसर, डीएसबी परिसर नैनीताल के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला संयोजक डॉ. नवीन भट्ट ने बताया कि प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 23 अप्रैल को पुरस्कृत किया जाएगा। कार्यशाला में महर्षि विवि की सहायक प्राध्यापक डॉ. निर्मला भास्कर, डॉ. प्रेम प्रकाश पांडे. डॉ. लल्लन कुमार सिंह, हेमलता अवस्थी, रितेश कुमार, मनोज गिरी, विरेंद्र सिंह, अर्चना, प्रदीप जोशी, पवन जोशी, अर्चना, दिनेश्वरी, रश्मि, विनीता रानी, बबीता टम्टा आदि मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, सहिष्णुता, धैर्य, भावनात्मक संतुलन के विकास के लिए यह अत्यंत मूल्यवान है। प्रेक्षाध्यान व्यक्ति की अनाशक्त चेतना को उजागर करता है। मनुष्य के जीवन में सात स्तर हैं। शरीर, श्वास, प्राण ऊर्जा, मस्तिष्क, भाव, आभामंडल, चेतना प्रेक्षाध्यान के माध्यम से निषेधक आभामंडल को विधेयक आभामंडल में रूपांतरित किया जा सकता है। यह व्यक्तित्व के परिवर्तन का कारक बनता है। प्रेक्षाध्यान चेतना, मन तथ अचेतन मन को नियंत्रित करता है। जिसके द्वारा हारमोंस को भी नियंत्रण में लाकर घृणा, क्रोध, ईर्ष्या आदि नकारात्मक भावों को प्रेम, विनम्रता में बदला जाता है। उन्होंने बताया कि कार्योत्सर्ग परानुंकणी नाड़ी तंत्र को सक्रिय बनाता है।
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इस मौके पर हुई योग चैंपियनशिप में पीजी कालेज खटीमा, पीजी कालेज काशीपुर, एसएसजे परिसर, डीएसबी परिसर नैनीताल के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला संयोजक डॉ. नवीन भट्ट ने बताया कि प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को 23 अप्रैल को पुरस्कृत किया जाएगा। कार्यशाला में महर्षि विवि की सहायक प्राध्यापक डॉ. निर्मला भास्कर, डॉ. प्रेम प्रकाश पांडे. डॉ. लल्लन कुमार सिंह, हेमलता अवस्थी, रितेश कुमार, मनोज गिरी, विरेंद्र सिंह, अर्चना, प्रदीप जोशी, पवन जोशी, अर्चना, दिनेश्वरी, रश्मि, विनीता रानी, बबीता टम्टा आदि मौजूद थे।
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