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साइबर क्राइम से 12 लाख उड़ाने वाले तीन आरोपी पुलिस ने धर दबोचे

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:47 PM IST
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Arested For Fraud in Ranikhet
पुलिस की गिरफ्त में साइबर क्राइम के आरोपी। संवाद - फोटो : RANIKHET
रानीखेत/अल्मोड़ा। अब तक ठग लॉटरी लगने, सिम बंद होने या गिफ्ट कूपन निकलने के नाम पर सिम धारकों से उनका ओटीपी नंबर पूछकर साइबर ठगी करते आए हैं। अब साइबर ठगों ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर उससे डुप्लीकेट सिम बनाने के बाद खातों से रकम निकालना शुरू कर दिया है। कोतवाली पुलिस ने साइबर अपराध कर कूटरचित तरीके से बैंक खाते से 12 लाख रुपये की निकासी का खुलासा किया है। पुलिस ने यूपी के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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साइबर ठगों ने 28 जनवरी को द्वाराहाट विकासखंड के ग्राम छानागोलू च्याली निवासी रमेश चंद्र के बैंक खाते से 12 लाख रुपये की राशि पार कर ली थी। द्वाराहाट थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना रानीखेत के कोतवाल को सौंपी गई थी। जांच के आधार पर आईटी एक्ट के तहत धाराएं और बढ़ाई गईं। जांच में साइबर सेल ने भी मदद की। सीओ ऑपरेशन ओशिन जोशी ने बृहस्पतिवार को बताया कि पीड़ित रमेश चंद्र का मोबाइल नंबर बैंक खाते से लिंक था लेकिन यूपी के संभल निवासी आरोपी ने कूटरचित तरीके से आधार कार्ड के जरिये उनके फोन नंबर का डमी सिम बना लिया। इसी डमी सिम के सहारे एक एप डाउनलोड करके पीड़ित के कई खातों में 12 लाख रुपये की अवैध निकासी कर दी। मामले की जांच कर आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की तीन टीमें गठित की गईं। पुलिस टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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इनमें दिल्ली में बैठकर सिम बदलने वाले पंचशील कॉलोनी संभल निवासी विशेष शर्मा, बैंक खाते में सबसे अधिक 6.75 लाख की राशि ट्रांसफर करने वाले अहरोला तेजवन अमरोहा निवासी धीरज कुमार और गौतम बुद्ध नगर नोएडा निवासी रॉबिन कुमार शामिल हैं। न्यायालय के आदेश पर तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
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एमप डाउनलोड करने पर निकाली रकम
रानीखेत (अल्मोड़ा)। सीओ आशिन जोशी ने कहा कि योनो एप एक ओटीपी से डाउनलोड हो जाता है। पीड़ित रमेश चंद्र का मोबाइल सिम नंबर किसी अन्य ने ले लिया तो एक एप डाउनलोड करने से उनके खाते से पैसा ट्रांसफर करना भी आसान हो गया। साइबर अपराधियों की लंबी चेन है। पैसा किन, किन खातों में ट्रांसफर हुआ है, पुलिस इसकी गहनता से जांच कर रही है।
मोबाइल कंपनी के दो कर्मचारी और एक रिटेनर ने की वारदात
अल्मोड़ा।अंतरराज्यीय साइबर ठग फर्जी आधार कार्ड और डुप्लीकेट सिम बनाकर ठगी करते थे। पुलिस की जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि एक मोबाइल कंपनी के दो कर्मचारियों व एक रिटेनर ने ही मिलकर घटना की थी। ठगी का खुलासा करनेे वाली टीम को एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने ढाई हजार रुपये नगद इनाम देने की घोषणा की है। पुलिस के अनुसार पकड़े गए साइबर ठग में दो एक मोबाइल कंपनी के कर्मचारी और एक कंपनी का रिटेनर है। इसी रिटेनर के खाते में ठगी की रकम आई थी।
ऐसे की ठगी
घटना को अंजाम देने के लिए सबसे पहले ठगों ने पीड़ित रमेश चंद्र का आधार कार्ड हासिल किया इसके लिए ठगों ने रमेश के मोबाइल पर सिम एक्सचेंज का मैसेज भी भेजा। इसके बाद उसका ऑनलाइन आधार कार्ड हासिल किया और संभल में आधार कार्ड में फोटो बदल दी। इसके बाद उसी आधार कार्ड से रमेश के नाम से एक डुप्लीकेट सिम लिया फिर सिम को एक मोबाइल में डालकर मोबाइल में उसी बैंक का बैंकिंग एप डाउनलोड किया। जिस बैंक में रमेश चंद्र का खाता था। एप डाउनलोड करने के बाद रकम निकालने की प्रक्रिया की जिसके लिए उन्हें बैंक के ओटीपी की जरूरत पड़ी। क्योंकि रमेश के आधार कार्ड से लिया गया डुप्लीकेट सिम उनके पास था जिससे उन्हें आसानी से ओटीपी मिल गया और ओटीपी की मदद से वह रमेश के खाते से रकम निकालते रहे।
एक और ठग पुलिस के रडार पर
अल्मोड़ा। साइबर ठगी के मामले में तीन अंतरराज्यीय ठगों को गिरफ्तार करने के बाद इस गिरोह के खिलाफ और कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य पुलिस के हाथ लगे हैं। जिनके आधार पर पुलिस ने गिरोह के एक और ठग को अपने रडार पर लिया है। माना जा रहा है कि इस ठग के पकड़ में आने के बाद पुलिस साइबर ठगी के कुछ और मामलों का भी खुलासा कर सकती है। पुलिस की चार टीमों ने तीन दिन काम करने के बाद सफलता हासिल की।
मोबाइल कंपनी के खिलाफ भी हो सकती है जांच
अल्मोड़ा। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि ठगी की पूरी वारदात को एक मोबाइल कंपनियों के दो कर्मचारियों और एक रिटेनर ने अंजाम दिया है। ठगी करने के लिए मोबाइल कंपनी के कर्मचारियों ने कई स्तर पर गड़बड़ी की। पहला उत्तराखंड के उपभोक्ता के आधार पर संभल में सिम जारी कर दिया गया। उत्तराखंड से लेकर संभल तक कहीं भी सिम का सत्यापन नहीं किया गया जबकि सिम में नाम आदि की डिटेल किसी और कि व फोटो किसी और का लगा था। जिसके आधार पर पुलिस मोबाइल कंपनी को भी अपनी जांच के दायरे में ले सकती है।

जाली आधार कार्ड की मदद से डुप्लीकेट सिम हासिल कर अंतरराज्जीय ठग खाते से रकम निकाल रहे थे। पूरी वारदात में एक मोबाइल कंपनी के दो कर्मचारियों और एक रिटेनर की भूमिका सामने आई है। कुछ और लोगों के भी पूरे मामले में शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं जिसकी जांच चल रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. मंजूनाथ टीसी, एसएसपी अल्मोड़ा।
ये बरतें सावधानी
- खाते से जो मोबाइल लिंक है, उसे बार-बार चेक करते रहें।
- सिम एक्टिविटी देखें, मैसेज आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
- एसएमएस पर भी ध्यान देना जरूरी है, प्रलोभन वाले कॉल पर ध्यान न दें।
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