{"_id":"61c3768fd2efa7220c00cfe3","slug":"agriculture-land-shrink-in-almora-almora-news-hld4485010132","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्मोड़ा में एक दशक में कम हो गया खेती का रकबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्मोड़ा में एक दशक में कम हो गया खेती का रकबा
विज्ञापन
राजेन्द्र सिंह बिष्ट
- फोटो : ALMORA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। जिले में आबादी तेजी से बढ़ रही है। आबादी के दबाव से खेती का रकबा लगातार कम हो रहा है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक दशक पहले तक जिले में 84 हजार हेक्टेयर में रबी और खरीफ की फसल की खेती होती थी। वर्तमान में खेती का रकबा घटकर 68 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है। कृषि के रकबे में साल दर साल कमी आ रही है। इसकी मुख्य वजह लोगों का शहरी क्षेत्रों को पलायन, प्लाटिंग और भवन निर्माण, जंगली जानवरों का आतंक आदि प्रमुख हैं।
शहरों और कस्बों में जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ी है उस हिसाब से शहरों में सीमेंट-कंक्रीट का जंगल भी पनप रहा है। पहाड़ के जिन गांवों में खेतों में कभी फसलें लहलहाती थीं वे अब कंक्रीट में तब्दील हो रहे हैं। रही सही कसर जंगली जानवरों ने पूरी कर दी है।
जंगली जानवरों का आतंक काफी बढ़ गया है। जिस कारण गांवों में खेती करना मुश्किल हो रहा है। खेती से आजीविका चलानी मुश्किल होते जा रही है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में गांव भी कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो जाएंगे।
विज्ञापन
- पना देवी, पातलीबगड़ (अल्मोड़ा)
गांव में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। किसान आसमानी बारिश पर निर्भर रहते हैं। बारिश नहीं होने फसल सूख जाती है। जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। यदि किसी साल फसल अच्छी भी हुई तो जंगली जानवर उसे नुकसान पहुंचा देते हैं।
- मुन्नी देवी, रैलाकोट (अल्मोड़ा)
कृषि का रकबा लगातार कम होते जा रहा है। जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने से किसान काफी परेशान हैं। जैसे ही फसल तैयार करते हैं जंगली जानवर उसे बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिलता है।
गांव से लगातार पलायन हो रहा है जो गांव में हैं भी वह भी पलायन करने को मजबूर हैं।
- राजेंद्र सिंह बिष्ट, बिमौला (अल्मोड़ा)
सालभर खेतों में खून पसीना बहाने के बाद किसानों के हिस्से सिर्फ बर्बादी आती है। कभी अतिवृष्टि में फसल बर्बाद हो जाती है तो कभी जंगली जानवर उसे रौंद देते हैं। कभी सूखे की मार से फसल को नुकसान पहुंचा है। इस कारण किसान खेती छोड़ अन्य काम करने को मजबूर हो रहे हैं।
- लक्ष्मण सिंह नेगी, हवालबाग (अल्मोड़ा)
विज्ञापन
शहरों और कस्बों में जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ी है उस हिसाब से शहरों में सीमेंट-कंक्रीट का जंगल भी पनप रहा है। पहाड़ के जिन गांवों में खेतों में कभी फसलें लहलहाती थीं वे अब कंक्रीट में तब्दील हो रहे हैं। रही सही कसर जंगली जानवरों ने पूरी कर दी है।
विज्ञापन
जंगली जानवरों का आतंक काफी बढ़ गया है। जिस कारण गांवों में खेती करना मुश्किल हो रहा है। खेती से आजीविका चलानी मुश्किल होते जा रही है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में गांव भी कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो जाएंगे।
विज्ञापन
- पना देवी, पातलीबगड़ (अल्मोड़ा)
गांव में सिंचाई का कोई साधन नहीं है। किसान आसमानी बारिश पर निर्भर रहते हैं। बारिश नहीं होने फसल सूख जाती है। जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। यदि किसी साल फसल अच्छी भी हुई तो जंगली जानवर उसे नुकसान पहुंचा देते हैं।
- मुन्नी देवी, रैलाकोट (अल्मोड़ा)
कृषि का रकबा लगातार कम होते जा रहा है। जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने से किसान काफी परेशान हैं। जैसे ही फसल तैयार करते हैं जंगली जानवर उसे बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिलता है।
गांव से लगातार पलायन हो रहा है जो गांव में हैं भी वह भी पलायन करने को मजबूर हैं।
- राजेंद्र सिंह बिष्ट, बिमौला (अल्मोड़ा)
सालभर खेतों में खून पसीना बहाने के बाद किसानों के हिस्से सिर्फ बर्बादी आती है। कभी अतिवृष्टि में फसल बर्बाद हो जाती है तो कभी जंगली जानवर उसे रौंद देते हैं। कभी सूखे की मार से फसल को नुकसान पहुंचा है। इस कारण किसान खेती छोड़ अन्य काम करने को मजबूर हो रहे हैं।
- लक्ष्मण सिंह नेगी, हवालबाग (अल्मोड़ा)

लक्ष्मण सिंह नेगी- फोटो : ALMORA