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कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों के कल्याण में भाकृअनुप की भूमिका महत्वपूर्ण: तोमर
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अल्मोड़ा। कृषि भवन नई दिल्ली में शनिवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) का 93वां स्थापना दिवस मनाया गया। भाकृअनुप के अध्यक्ष, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम का ऑनलाइन शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि कृषि केंद्रित देश होने के नाते किसान हमारे देश की संपत्ति हैं। परिषद किसानों के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस दौरान किसान सारथी इंटरफेस मंच भी जारी किया गया।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि पिछले नौ दशक में भाकृअनुप का लंबा सफर सराहनीय रहा है। अनुसंधान, प्रशिक्षण, कृषि शिक्षा कार्यक्रमों समेत कई उपलब्धियां रहीं हैं।
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यह किसी भी संस्था या उस देश की सरकार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ खेती की नई पद्धतियों को अपनाने के लिए किसान प्रशंसा के पात्र हैं, वहीं दूसरी तरफ नई प्रौद्योगिकियों को किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक प्रशंसा के पात्र हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत उत्सव समारोह के तहत भाकृअनुप की ओर से जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तरीय जागरूकता अभियान चलाया गया। देशभर के 400 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों ने इसमें भाग लिया है। कार्यक्रम के दौरान सूचना संचार एवं प्रौद्योगिकी आईसीटी आधारित किसान सारथी इंटरफेस मंच भी जारी किया गया।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुशोत्तम रूपाला, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी रेलवे और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग सचिव संजय अग्रवाल आदि रहे।
किसानों को सम्मान, प्रकाशनों का भी हुआ विमोचन
अल्मोड़ा। स्थापना दिवस के मौके पर चार श्रेणियों के 16 वर्ग में विजेताओं को कुल 60 लोगों को पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों में चार संस्थान, एक अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, चार केवीके, 39 वैज्ञानिक और 11 किसान शामिल रहे।
50 सम्मानित व्यक्तियों में से 12 महिलाएं शामिल रहीं। विभिन्न श्रेणियों में हिंदी राजभाषा पुरस्कार भी घोषित किए गए। वहीं भाकृअनुप प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।
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उन्होंने कहा कि कृषि केंद्रित देश होने के नाते किसान हमारे देश की संपत्ति हैं। परिषद किसानों के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस दौरान किसान सारथी इंटरफेस मंच भी जारी किया गया।
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केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि पिछले नौ दशक में भाकृअनुप का लंबा सफर सराहनीय रहा है। अनुसंधान, प्रशिक्षण, कृषि शिक्षा कार्यक्रमों समेत कई उपलब्धियां रहीं हैं।
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यह किसी भी संस्था या उस देश की सरकार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ खेती की नई पद्धतियों को अपनाने के लिए किसान प्रशंसा के पात्र हैं, वहीं दूसरी तरफ नई प्रौद्योगिकियों को किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक प्रशंसा के पात्र हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत उत्सव समारोह के तहत भाकृअनुप की ओर से जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तरीय जागरूकता अभियान चलाया गया। देशभर के 400 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों ने इसमें भाग लिया है। कार्यक्रम के दौरान सूचना संचार एवं प्रौद्योगिकी आईसीटी आधारित किसान सारथी इंटरफेस मंच भी जारी किया गया।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुशोत्तम रूपाला, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी रेलवे और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग सचिव संजय अग्रवाल आदि रहे।
किसानों को सम्मान, प्रकाशनों का भी हुआ विमोचन
अल्मोड़ा। स्थापना दिवस के मौके पर चार श्रेणियों के 16 वर्ग में विजेताओं को कुल 60 लोगों को पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों में चार संस्थान, एक अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, चार केवीके, 39 वैज्ञानिक और 11 किसान शामिल रहे।
50 सम्मानित व्यक्तियों में से 12 महिलाएं शामिल रहीं। विभिन्न श्रेणियों में हिंदी राजभाषा पुरस्कार भी घोषित किए गए। वहीं भाकृअनुप प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।