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Almora News: पौधरोपण के लिए जमीन नहीं खोज पा रहा प्रशासन, सड़कों का निर्माण लटका
Fri, 19 Jan 2024 12:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 19 Jan 2024 12:30 AM IST
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अल्मोड़ा। सड़कों को गांवों के विकास के लिए जरूरी तो बताया जा रहा है, लेकिन इनके निर्माण के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। तीन सालों से लटकीं 10 सड़कें इनका प्रमाण हैं। 55 से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए इन सड़कों को तीन साल पूर्व स्वीकृति तो मिली। सड़कों के निर्माण में कई पेड़ काटे गए मगर इनकी जगह पौधरोपण नहीं हो सका है। जिले में लैंड बैंक शून्य है। प्रशासन पौधरोपण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। ऐसे में इन सड़कों के जल्द धरातल पर उतरना मुश्किल है।
जिले में सोमेश्वर, द्वाराहाट और अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 55 से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए वर्ष 2021 में 10 सड़कों को स्वीकृति मिली। इनके लिए करोड़ों का बजट भी जारी हुआ। सड़कों के निर्माण के लिए सर्वे के बाद इनके दायरे में आने वाले पेड़ों को काटना था और कटे पेड़ों की जगह पौधरोपण होना था। पौधरोपण के लिए जमीन खोजने और कार्यदायी संस्था को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन के पास मौजूद लैंड बैंक शून्य है। तीन साल बाद भी करीब 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है और ये सभी सड़कें अधर में लटकी हैं जिससे गांवों के 20 हजार की आबादी को इन हालात में सड़क की सौगात मिलना मुश्किल है।
सरकारी खाते में डंप है पैसा
अल्मोड़ा। इन गांवों के ग्रामीणों को आजादी के 76 साल बाद भी सड़क नसीब नहीं हुई है और सुविधाओं के अभाव में वे पलायन कर रहे हैं। किसी तरह सड़कें तो स्वीकृत हुईं और इनके लिए करीब 15 करोड़ रुपये का बजट भी जारी हुआ। लेकिन सड़क निर्माण की कार्रवाई कागजों में ही दौड़ रही है और इनके लिए मिला बजट सरकारी खाते में डंप है।
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अन्य जिलों में तलाशी जा रही है जमीन
अल्मोड़ा। सड़क निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों की जगह पौधरोपण का नियम है। जितनी भूमि पर पेड़ काटे जाते हैं, उसकी दोगुनी भूमि पर पौधरोपण जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक जिले में पौधरोपण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अन्य जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है जो किसी चुनौती से कम नहीं है।
एडीएम अल्मोड़ा सीएस मर्तोलिया ने कहा प्रशासन के पास पौधरोपण के लिए लैंड बैंक शून्य है। अन्य जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है। निश्चित तौर पर भूमि मिलने के बाद ही सड़क निर्माण संभव है।
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जिले में सोमेश्वर, द्वाराहाट और अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 55 से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए वर्ष 2021 में 10 सड़कों को स्वीकृति मिली। इनके लिए करोड़ों का बजट भी जारी हुआ। सड़कों के निर्माण के लिए सर्वे के बाद इनके दायरे में आने वाले पेड़ों को काटना था और कटे पेड़ों की जगह पौधरोपण होना था। पौधरोपण के लिए जमीन खोजने और कार्यदायी संस्था को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन के पास मौजूद लैंड बैंक शून्य है। तीन साल बाद भी करीब 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है और ये सभी सड़कें अधर में लटकी हैं जिससे गांवों के 20 हजार की आबादी को इन हालात में सड़क की सौगात मिलना मुश्किल है।
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सरकारी खाते में डंप है पैसा
अल्मोड़ा। इन गांवों के ग्रामीणों को आजादी के 76 साल बाद भी सड़क नसीब नहीं हुई है और सुविधाओं के अभाव में वे पलायन कर रहे हैं। किसी तरह सड़कें तो स्वीकृत हुईं और इनके लिए करीब 15 करोड़ रुपये का बजट भी जारी हुआ। लेकिन सड़क निर्माण की कार्रवाई कागजों में ही दौड़ रही है और इनके लिए मिला बजट सरकारी खाते में डंप है।
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अन्य जिलों में तलाशी जा रही है जमीन
अल्मोड़ा। सड़क निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों की जगह पौधरोपण का नियम है। जितनी भूमि पर पेड़ काटे जाते हैं, उसकी दोगुनी भूमि पर पौधरोपण जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक जिले में पौधरोपण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अन्य जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है जो किसी चुनौती से कम नहीं है।
एडीएम अल्मोड़ा सीएस मर्तोलिया ने कहा प्रशासन के पास पौधरोपण के लिए लैंड बैंक शून्य है। अन्य जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है। निश्चित तौर पर भूमि मिलने के बाद ही सड़क निर्माण संभव है।