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अपने उद्देश्य को साकार नहीं कर रही संगीत नाट्य अकादमी

Mon, 06 Mar 2017 10:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 06 Mar 2017 10:56 PM IST
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Academy of Music Theatre
वार्षिकोत्सव में नाटक प्रस्तुत करते बच्चे।

अल्मोड़ा। नृत्य सम्राट स्व. उदय शंकर की स्मृति में अल्मोड़ा में राष्ट्रीय संगीत नाट्य अकादमी के भवन का शिलान्यास 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने किया। समय पर पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण कई बार भवन का निर्माण बंद भी रहा और काफी मुश्किलों के बाद आखिरकार 13 साल में भवन पूरा हो सका। नवंबर 2015 में राज्योत्सव के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों नाट्य अकादमी का लोकार्पण भी कर दिया गया, लेकिन जिस उद्देश्य के लिए यह संस्थान बनाया गया था वह आज भी अधूरा है। हालांकि लोककला केंद्र के अंतर्गत वहां कुछ गतिविधियां चल रही हैं। 

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अल्मोड़ा विश्वविख्यात नृत्य सम्राट स्व. उदय शंकर की कर्म भूमि रही है। उन्होंने अल्मोड़ा में 1938 में द उदय शंकर कल्चर सेंटर की स्थापना की और 1938 से 1943 तक इस सेंटर को यहां चलाया। बाद में भी उनका अल्मोड़ा आना-जाना लगा रहा, लेकिन अल्मोड़ा में स्थायी कल्चर सेंटर बनाने का उनका सपना अधूरा रह गया। उदय शंकर के इस सपने को पूरा करने के लिए बाद में उनकी पत्नी अमला शंकर ने प्रयास किए। उन्हीं के आग्रह पर 2002 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन ने अल्मोड़ा में राष्ट्रीय संगीत नाट्य अकादमी के निर्माण को मंजूरी दी।    
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अकादमी के भवन की आधारशिला अक्तूबर 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने रखी। राष्ट्रपति द्वारा शिलान्यास करने के बावजूद इस भवन के निर्माण में शुरू से ही दिक्कतें हुईं। तब भवन निर्माण की समय सीमा अक्तूबर 2005 रखी गई थी। शुरू से ही इस भवन का निर्माण कार्य समय-समय पर रुकता रहा।
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करीब आठ करोड़ रुपए खर्च होने के बाद अंतिम चरण के कार्य के लिए पैसा कम पड़ गया। काफी मुश्किलों के बाद अब भवन का काम तो पूरा हुआ। नवंबर 2015 में गुरुड़ाबांज में आयोजित राज्योत्सव के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों इसका लोकार्पण भी करवा दिया गया, लेकिन सही मायने में यह संस्थान आज भी अस्तित्व में नहीं आ सका है। हालांकि संस्कृति विभाग ने वहां लोक कला केंद्र के अंतर्गत कुछ गतिविधियां शुरू की हैं, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान का रूप देने के लिए अभी बहुत कुछ होना बाकी है।  
 

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