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ताड़ीखेत से महात्मा गांधी ने कुमाऊं में जलाई थी आजादी की अलख

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Oct 2019 06:39 PM IST
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a hut made for bapu in two and half days
ताड़ीखेत की ऐतिहासिक गांधी कुटिया। अमर उजाला - फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। आजादी की लड़ाई में रानखेत क्षेत्र का योगदान भी अहम है। यही वह स्थान है, जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी में कुमाऊं के रणबांकुरों में जोश भरा था। गांधी जी के अचानक आगमन की सूचना सुन लोगों ने ताड़ीखेत में उनके ठहरने के लिए ढाई दिन में एक कुटिया का निर्माण तक कर डाला। 1929 में महात्मा गांधी यहां प्रवास पर आए और तीन दिन कुमाऊं भर से पहुंचे रणबांकुरों में उन्होंने आजादी की अलख जलाई। महात्मा गांधी के जाने के बाद यह कुटिया आंदोलनकारियों का प्रशिक्षण केंद्र भी रही।
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1929 में महात्मा गांधी ताड़ीखेत प्रवास पर पहुंचे। उनके आगमन की सूचना सुनकर आंदोलनकारियों और क्षेत्रवासियों में काफी उत्साह भर गया। महात्मा गांधी के प्रवास के लिए यहां प्रेम विद्यालय के पास ढाई दिन में कुटिया का निर्माण हुआ। गांधी जी 17 जून को ताड़ीखेत पहुंचे और कुटिया से ही उन्होंने आंदोलनकारियों में आजादी की अलख जलाई।
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तत्कालीन आंदोलनकारी गोविंद बल्लभ पंत, हरगोविंद पंत, स्व. देवकी नंदन सहित तमाम लोगों ने गांधी जी की अगवानी की। तीन दिन तक रानीखेत उपमंडल के अलावा कुमाऊं भर के आंदोलनकारियों का यहां हुजूम उमड़ पड़ा। ताड़ीखेत की कुटिया आज भी गांधी कुटीर के नाम से जानी जाती है।
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