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Almora News: दिल का डिजिटल दोस्त हार्ट अटैक से पहले करेगा आगाह
Sat, 04 Jul 2026 01:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 04 Jul 2026 01:00 AM IST
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अल्मोड़ा। बदलती जीवनशैली के कारण हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के आकलन के लिए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल मरीज के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर हार्ट अटैक के जोखिम की समय रहते पहचान करने में सक्षम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक मरीजों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग और समय पर उपचार शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शोध में केवल हार्ट अटैक के जोखिम का पूर्वानुमान ही नहीं लगाया गया बल्कि मरीजों को अलग-अलग जोखिम समूहों में वर्गीकृत करने के लिए क्लस्टरिंग तकनीकों का भी उपयोग किया गया। के-मीन्स, के-मेडॉइड्स और एग्लोमेरेटिव क्लस्टरिंग के तुलनात्मक अध्ययन में के-मेडॉइड्स एल्गोरिद्म ने 0.61 सिल्हूट स्कोर के साथ सबसे बेहतर परिणाम दिए। इससे मरीजों के जोखिम स्तर और हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में मदद मिली।
एआई आधारित मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने वाले डॉ. पारस नेगी ने बताया कि भविष्य में यह तकनीक अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकीय निर्णय सहायता प्रणाली (डिसीजन सपोर्ट सिस्टम) के रूप में उपयोगी हो सकती है। इससे जोखिम वाले मरीजों की समय रहते पहचान कर शीघ्र उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।
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ऐसे हुआ शोध...
शोध में आयु, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ईसीजी रिपोर्ट, अधिकतम हृदय गति और सीने में दर्द जैसे चिकित्सकीय मानकों का विश्लेषण किया गया। इन आंकड़ों पर सपोर्ट वेक्टर मशीन (एसवीएम), लॉजिस्टिक रिग्रेशन, के-नियरेस्ट नेबर (केएनएन), रैंडम फॉरेस्ट, ग्रेडिएंट बूस्टिंग सहित विभिन्न मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का परीक्षण किया गया। केएनएन और ग्रेडिएंट बूस्टिंग के संयुक्त एनसेंबल मॉडल ने लगभग 97 प्रतिशत सटीकता के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जबकि एसवीएम और लॉजिस्टिक रिग्रेशन के संयोजन ने करीब 95 प्रतिशत सटीकता हासिल की।
हर साल करोड़ों लोगों की जान पर खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वर्ष 2022 में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी बीमारियों से दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे में हार्ट अटैक के खतरे की समय रहते पहचान करने वाली यह तकनीक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
शोध की प्रमुख उपलब्धियां
एआई एवं मशीन लर्निंग आधारित हार्ट अटैक जोखिम पहचान मॉडल विकसित।
केएनएन + ग्रेडिएंट बूस्टिंग संयुक्त मॉडल ने 97% सटीकता हासिल की।
एसवीएम + लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल ने 95% सटीकता प्राप्त की।
के-मीन्स, के-मेडॉइड्स और एग्लोमेरेटिव क्लस्टरिंग का तुलनात्मक अध्ययन।
के-मेडॉइड्स ने 0.61 सिल्हूट स्कोर के साथ सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर गुणवत्ता प्रदर्शित की।
अस्पतालों में प्रारंभिक स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय निर्णय सहायता प्रणाली के रूप में उपयोग की संभावना।
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मशीन लर्निंग मॉडल का सफलता प्रतिशत
एनसेंबल मॉडल (केएनएन+ ग्रेडिएंट बूस्टिंग)
97%
एनसेंबल मॉडल (एसवीएम + लॉजिस्टिक रिग्रेशन) 95%
रैंडम फॉरेस्ट 96%
बैगिंग 97%
बूस्टिंग 97%
सपोर्ट वेक्टर मशीन (एसवीएम) 97%
लॉजिस्टिक रिग्रेशन 86%
डिसीजन ट्री 95%
के-नियरेस्ट नेबर (केएनएन) 95%
मल्टी लेयर परसेप्ट्रॉन एमएलपी) 88%
क्लस्टरिंग विश्लेषण
के-मेडॉइड्स एल्गोरिद्म ने 0.61 सिल्हूट स्कोर प्राप्त किया।
यह परिणाम दर्शाता है कि के-मेडॉइड्स ने मरीजों के विभिन्न जोखिम समूहों की पहचान सबसे प्रभावी ढंग से की और सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर गुणवत्ता प्रदर्शित की।
यह शोध कार्य कंप्यूटर विज्ञान के प्राध्यापक डा. मनोज कुमार बिष्ट के निर्देशन में पूरा हुआ। मशीन लर्निंग की मदद से हार्ट के खतरे को अब समय से पहले ही पहचाना जा सकेगा। इससे तेज और सटीक परिणाम मिल सकेंगे।
- डॉ. पारस नेगी, शोधार्थी, कंप्यूटर विज्ञान विभाग, एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा
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शोध में केवल हार्ट अटैक के जोखिम का पूर्वानुमान ही नहीं लगाया गया बल्कि मरीजों को अलग-अलग जोखिम समूहों में वर्गीकृत करने के लिए क्लस्टरिंग तकनीकों का भी उपयोग किया गया। के-मीन्स, के-मेडॉइड्स और एग्लोमेरेटिव क्लस्टरिंग के तुलनात्मक अध्ययन में के-मेडॉइड्स एल्गोरिद्म ने 0.61 सिल्हूट स्कोर के साथ सबसे बेहतर परिणाम दिए। इससे मरीजों के जोखिम स्तर और हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में मदद मिली।
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एआई आधारित मशीन लर्निंग मॉडल विकसित करने वाले डॉ. पारस नेगी ने बताया कि भविष्य में यह तकनीक अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकीय निर्णय सहायता प्रणाली (डिसीजन सपोर्ट सिस्टम) के रूप में उपयोगी हो सकती है। इससे जोखिम वाले मरीजों की समय रहते पहचान कर शीघ्र उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।
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ऐसे हुआ शोध...
शोध में आयु, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ईसीजी रिपोर्ट, अधिकतम हृदय गति और सीने में दर्द जैसे चिकित्सकीय मानकों का विश्लेषण किया गया। इन आंकड़ों पर सपोर्ट वेक्टर मशीन (एसवीएम), लॉजिस्टिक रिग्रेशन, के-नियरेस्ट नेबर (केएनएन), रैंडम फॉरेस्ट, ग्रेडिएंट बूस्टिंग सहित विभिन्न मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का परीक्षण किया गया। केएनएन और ग्रेडिएंट बूस्टिंग के संयुक्त एनसेंबल मॉडल ने लगभग 97 प्रतिशत सटीकता के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जबकि एसवीएम और लॉजिस्टिक रिग्रेशन के संयोजन ने करीब 95 प्रतिशत सटीकता हासिल की।
हर साल करोड़ों लोगों की जान पर खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वर्ष 2022 में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी बीमारियों से दुनिया भर में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे में हार्ट अटैक के खतरे की समय रहते पहचान करने वाली यह तकनीक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
शोध की प्रमुख उपलब्धियां
एआई एवं मशीन लर्निंग आधारित हार्ट अटैक जोखिम पहचान मॉडल विकसित।
केएनएन + ग्रेडिएंट बूस्टिंग संयुक्त मॉडल ने 97% सटीकता हासिल की।
एसवीएम + लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल ने 95% सटीकता प्राप्त की।
के-मीन्स, के-मेडॉइड्स और एग्लोमेरेटिव क्लस्टरिंग का तुलनात्मक अध्ययन।
के-मेडॉइड्स ने 0.61 सिल्हूट स्कोर के साथ सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर गुणवत्ता प्रदर्शित की।
अस्पतालों में प्रारंभिक स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय निर्णय सहायता प्रणाली के रूप में उपयोग की संभावना।
मशीन लर्निंग मॉडल का सफलता प्रतिशत
एनसेंबल मॉडल (केएनएन+ ग्रेडिएंट बूस्टिंग)
97%
एनसेंबल मॉडल (एसवीएम + लॉजिस्टिक रिग्रेशन) 95%
रैंडम फॉरेस्ट 96%
बैगिंग 97%
बूस्टिंग 97%
सपोर्ट वेक्टर मशीन (एसवीएम) 97%
लॉजिस्टिक रिग्रेशन 86%
डिसीजन ट्री 95%
के-नियरेस्ट नेबर (केएनएन) 95%
मल्टी लेयर परसेप्ट्रॉन एमएलपी) 88%
क्लस्टरिंग विश्लेषण
के-मेडॉइड्स एल्गोरिद्म ने 0.61 सिल्हूट स्कोर प्राप्त किया।
यह परिणाम दर्शाता है कि के-मेडॉइड्स ने मरीजों के विभिन्न जोखिम समूहों की पहचान सबसे प्रभावी ढंग से की और सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर गुणवत्ता प्रदर्शित की।
यह शोध कार्य कंप्यूटर विज्ञान के प्राध्यापक डा. मनोज कुमार बिष्ट के निर्देशन में पूरा हुआ। मशीन लर्निंग की मदद से हार्ट के खतरे को अब समय से पहले ही पहचाना जा सकेगा। इससे तेज और सटीक परिणाम मिल सकेंगे।
- डॉ. पारस नेगी, शोधार्थी, कंप्यूटर विज्ञान विभाग, एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा