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मौसम की दोहरी मार, सूख गए पौधे
Almora
Updated Mon, 24 Nov 2014 05:30 AM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ऐसी पीड़ा गगास घाटी के उन सभी गांवों के किसानों की है, जो प्याज के पौधों से हर साल लाखों रुपए का मुनाफा कमाते हैं, लेकिन इस बार मौसम की दोहरी मार ने घाटी में प्याज के पौधों को चौपट कर दिया है। इन गांवों से रानीखेत बाजार आ रहे काश्तकारों का कहना है कि इस बार प्याज लोकल के बाजार तक ही सिमट जाएगा। क्योंकि करीब 60 फीसदी पौधों को नुकसान पहुंचा है।
घाटी में नासिक रेड प्रजाति के बीज से प्याज की पौध तैयार की जाती हैं। काश्तकार बाहर से बीज नहीं खरीदते, बल्कि नर्सरी से ही बीज प्याज के पौधों के बीज निकाल लेते हैं। घाटी के करीब 350 परिवार प्याज की खेती से जुड़े हैं। अगस्त और सितंबर में पौधों की नर्सरी तैयार की जाी हैं, लेकिन इस बार नर्सरी में बुआई के वक्त अधिक बारिश हुई। जिससे जमीन की नमी लंबे समय तक नहीं सूखी। इसलिए बोए हुए अधिकांश प्याज के बीज जमीन के अंदर ही सड़ गए। बारिश से बचकर जो पौधे तैयार हुए, उस पर कोहरे की मार पड़ी और पौधे सही ढंग से विकसित नहीं हो पाए। बाजार में किसान जिस पौधे को बेच रहे हैं, वह काफी पतली है। जिसे लोग कम पसंद करते हैं।
निराई, गुड़ाई के बाद नवंबर दूसरे सप्ताह तक पौधे निकालने का काम शुरू हो जाता है। गगास घाटी का प्याज सोमेश्वर, गरुड़, बागेश्वर, हवालबाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चौखुटिया मुनस्यारी, चंपावत, डीडीहाट, धारचूला आदि क्षेत्रों में तक सप्लाई होता है। हर सीजन में प्याज उत्पादक किसान दो से ढाई लाख रुपए कमा लेते हैं, लेकिन इस बार प्याज उत्पादन सिमट गया है।
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घाटी में नासिक रेड प्रजाति के बीज से प्याज की पौध तैयार की जाती हैं। काश्तकार बाहर से बीज नहीं खरीदते, बल्कि नर्सरी से ही बीज प्याज के पौधों के बीज निकाल लेते हैं। घाटी के करीब 350 परिवार प्याज की खेती से जुड़े हैं। अगस्त और सितंबर में पौधों की नर्सरी तैयार की जाी हैं, लेकिन इस बार नर्सरी में बुआई के वक्त अधिक बारिश हुई। जिससे जमीन की नमी लंबे समय तक नहीं सूखी। इसलिए बोए हुए अधिकांश प्याज के बीज जमीन के अंदर ही सड़ गए। बारिश से बचकर जो पौधे तैयार हुए, उस पर कोहरे की मार पड़ी और पौधे सही ढंग से विकसित नहीं हो पाए। बाजार में किसान जिस पौधे को बेच रहे हैं, वह काफी पतली है। जिसे लोग कम पसंद करते हैं।
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निराई, गुड़ाई के बाद नवंबर दूसरे सप्ताह तक पौधे निकालने का काम शुरू हो जाता है। गगास घाटी का प्याज सोमेश्वर, गरुड़, बागेश्वर, हवालबाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चौखुटिया मुनस्यारी, चंपावत, डीडीहाट, धारचूला आदि क्षेत्रों में तक सप्लाई होता है। हर सीजन में प्याज उत्पादक किसान दो से ढाई लाख रुपए कमा लेते हैं, लेकिन इस बार प्याज उत्पादन सिमट गया है।
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