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मांगें माने बिना नहीं मानेंगे
Almora
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:33 AM IST
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अल्मोड़ा। चार सूत्रीय मांगों को लेकर कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारी शुक्रवार को भी कार्य बहिष्कार कर कलक्ट्रेट प्रांगण में धरने पर बैठे। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
वक्ताओं ने कहा कि कलक्ट्रेट का पुनर्गठन नहीं किया जा रहा है। नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती के 10 फीसदी पदों पर प्रोन्नति देने, कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता स्नातक करने की मांग पर भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन हठधर्मी रवैया अपनाए हुए है। मांगों के समाधान के लिए सरकार उदासीन बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिहरी गढ़वाल के डीएम के वैयक्तिक सहायक वीरेंद्र सिंह कर्मचारियों के उत्पीड़न पर उतारू हैं। उनका तबादला भी नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर आंदोलन तेज किया जाएगा। सभा में बलवंत देवड़ी, रमेश कुमार, विपिन मुनगली, ललित भाकुनी, उमेश पांडे, भूपेंद्र मेहता, महेंद्र डसीला, कमलेश अधिकारी, शशिमोहन पांडे, राजेश कुमार, किशन लटवाल, मदन मनराल, जसपाल बिष्ट, तनुज बिष्ट, सुधा त्रिपाठी, लीला बोरा, विमला मठपाल, ज्योति नपलच्याल, कृष्णा आर्या, मुन्नी आर्या आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता ईश्वर खलझूनिया और संचालन जगजीवन बिष्ट ने किया। चमोली से आए कर्मचारी संजय पाल और पौड़ी के सुरेंद्र प्रसाद भी धरने पर बैठे।
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वक्ताओं ने कहा कि कलक्ट्रेट का पुनर्गठन नहीं किया जा रहा है। नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती के 10 फीसदी पदों पर प्रोन्नति देने, कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता स्नातक करने की मांग पर भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन हठधर्मी रवैया अपनाए हुए है। मांगों के समाधान के लिए सरकार उदासीन बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि टिहरी गढ़वाल के डीएम के वैयक्तिक सहायक वीरेंद्र सिंह कर्मचारियों के उत्पीड़न पर उतारू हैं। उनका तबादला भी नहीं किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर आंदोलन तेज किया जाएगा। सभा में बलवंत देवड़ी, रमेश कुमार, विपिन मुनगली, ललित भाकुनी, उमेश पांडे, भूपेंद्र मेहता, महेंद्र डसीला, कमलेश अधिकारी, शशिमोहन पांडे, राजेश कुमार, किशन लटवाल, मदन मनराल, जसपाल बिष्ट, तनुज बिष्ट, सुधा त्रिपाठी, लीला बोरा, विमला मठपाल, ज्योति नपलच्याल, कृष्णा आर्या, मुन्नी आर्या आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता ईश्वर खलझूनिया और संचालन जगजीवन बिष्ट ने किया। चमोली से आए कर्मचारी संजय पाल और पौड़ी के सुरेंद्र प्रसाद भी धरने पर बैठे।
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