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सातवें दिन अंगद-रावण संवाद रहा आकर्षण का केंद्र
Almora
Updated Wed, 28 May 2014 05:38 AM IST
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अल्मोड़ा। प्रकाश युवा कला समिति की ओर से नंदादेवी मंदिर प्रांगण में चल रही कुमाऊंनी रामलीला के सातवें दिन राम दल द्वारा शिव आराधना, सेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण- मेघनाथ युद्ध, लक्ष्मण शक्ति, हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी, सुषैन वैद्य द्वारा लक्ष्मण उपचार आदि प्रसंगों का मंचन हुआ।
सातवें दिन खास कर अंगद-रावण संवाद का प्रसंग आकर्षण का केंद्र रहा। अंगद रावण से कहता है- अंगदा छ: नामा ऐ रयू काम लै, बेडरा घुमनू रामौ क नामे ले। जवाब में रावण अंगद से कहता है- म्यार ध्यावा मकैणी अकला सिखा छै, जोगि जमातो की तू,बड़म्याई करैछै। छै बालि का च्येला तू अल्ले या बै जा मेरी ली जा पल्टना काकै कै मारी आ...। कुमाऊंनी रामलीला का निर्देशन ताड़ीखेत के समीप तिमला गांव निवासी आनंद बल्लभ पपनै कर रहे हैं। उन्होंने ही इस कुमाऊंनी रामलीला नाटक की रचना की है और गीत संगीत भी उन्हीं का है। 72 वर्षीय श्री पपनै रामलीला के आयोजन के लिए रात दिन जुटे रहते हैं।
सातवें दिन खास कर अंगद-रावण संवाद का प्रसंग आकर्षण का केंद्र रहा। अंगद रावण से कहता है- अंगदा छ: नामा ऐ रयू काम लै, बेडरा घुमनू रामौ क नामे ले। जवाब में रावण अंगद से कहता है- म्यार ध्यावा मकैणी अकला सिखा छै, जोगि जमातो की तू,बड़म्याई करैछै। छै बालि का च्येला तू अल्ले या बै जा मेरी ली जा पल्टना काकै कै मारी आ...। कुमाऊंनी रामलीला का निर्देशन ताड़ीखेत के समीप तिमला गांव निवासी आनंद बल्लभ पपनै कर रहे हैं। उन्होंने ही इस कुमाऊंनी रामलीला नाटक की रचना की है और गीत संगीत भी उन्हीं का है। 72 वर्षीय श्री पपनै रामलीला के आयोजन के लिए रात दिन जुटे रहते हैं।
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