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करवाचौथ की पूजा सामग्री से श्रृंगार तक के सामान से नगर की बाजारे सजी
Updated Thu, 25 Oct 2018 10:52 PM IST
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करवाचौथ की पूजा सामग्री से नगर के बाजार सजे
अल्मोड़ा। पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को बढ़ाने वाला करवाचौथ का पर्व नजदीक आते ही नगर के बाजार पूजन सामग्री से सज गए हैं। महिलाओं ने बाजार से साड़ी, श्रंगार से संबंधित वस्तुओं की खरीदारी शुरू कर दी है। इस बार यह पर्व 27 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
करवाचौथ व्रत में विवाहित महिलाओं के लिए श्रंगार का खास महत्व है। वह विवाह के समय ओढ़ी गई चुनरी ओढ़ती हैं। महिलाओं ने बाजार से नए वस्त्र, पूजा की सामग्री खरीदी। पूजन सामग्री में मिट्टी से बने करवा और नैवेद्य का खास महत्व है। करवा पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना गया है।
करवा चौथ में रात्रि में चांद निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखकर चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने का विधान है। व्रत खोलने से पहले करवाचौथ के व्रत की महिमा बताने वाली कथा सुनाने का भी रिवाज है। जिस साल लड़की की शादी होती है उस साल उसके मायके से व्रत और पूजा का सामान आता है। पहाड़ में वट सावित्री के साथ ही करवाचौथ के व्रत का प्रचलन बढ़ रहा है।
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फोटो- (26एएलएम01पी)
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अल्मोड़ा। पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को बढ़ाने वाला करवाचौथ का पर्व नजदीक आते ही नगर के बाजार पूजन सामग्री से सज गए हैं। महिलाओं ने बाजार से साड़ी, श्रंगार से संबंधित वस्तुओं की खरीदारी शुरू कर दी है। इस बार यह पर्व 27 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
करवाचौथ व्रत में विवाहित महिलाओं के लिए श्रंगार का खास महत्व है। वह विवाह के समय ओढ़ी गई चुनरी ओढ़ती हैं। महिलाओं ने बाजार से नए वस्त्र, पूजा की सामग्री खरीदी। पूजन सामग्री में मिट्टी से बने करवा और नैवेद्य का खास महत्व है। करवा पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना गया है।
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करवा चौथ में रात्रि में चांद निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखकर चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने का विधान है। व्रत खोलने से पहले करवाचौथ के व्रत की महिमा बताने वाली कथा सुनाने का भी रिवाज है। जिस साल लड़की की शादी होती है उस साल उसके मायके से व्रत और पूजा का सामान आता है। पहाड़ में वट सावित्री के साथ ही करवाचौथ के व्रत का प्रचलन बढ़ रहा है।
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फोटो- (26एएलएम01पी)