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सरकार ने चाय विकास बोर्ड को स्वीकृत किए 17 करोड़
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 17 करोड़ रुपये स्वीकृत हो गए हैं। इस धनराशि से बोर्ड 200 हेक्टेयर नए क्षेत्र में चाय बागान विकसित करेगा। बागानों के रखरखाव साथ ही नई नर्सरियां भी बनाई जाएंगी।
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में चाय विकास बोर्ड अब तक 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित कर चुका है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए उत्तराखंड सरकार ने बोर्ड के लिए 17 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। इसमें से तीन करोड़ रुपये वेतन मद के लिए स्वीकृत हैं, जबकि 11 करोड़ रुपये से चंपावत, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रपुर और टिहरी जिले में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में नए चाय बागान विकसित किए जाएंगे। इन जिलों में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बागानों का रखरखाव भी किया जाएगा।
स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत तीन करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इस धनराशि से धौलादेवी, हरिनगरी, धरमघर और मुनस्यारी में 200 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय के पौधों का प्लांटेशन होगा। 200 हेक्टेयर क्षेत्र में बागान का रखरखाव और 25 लाख पौधों की नर्सरी विकसित की जानी है।
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बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि धनराशि अवमुक्त होने पर नए क्षेत्रों में बागान विकसित किए जाएंगे। बोर्ड के माध्यम से चार हजार मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है वहीं प्रदेश 2612 काश्तकार चाय उत्पाद से जुड़ चुके हैं।
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प्रदेश के पर्वतीय जिलों में चाय विकास बोर्ड अब तक 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित कर चुका है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए उत्तराखंड सरकार ने बोर्ड के लिए 17 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। इसमें से तीन करोड़ रुपये वेतन मद के लिए स्वीकृत हैं, जबकि 11 करोड़ रुपये से चंपावत, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रपुर और टिहरी जिले में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में नए चाय बागान विकसित किए जाएंगे। इन जिलों में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बागानों का रखरखाव भी किया जाएगा।
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स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत तीन करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इस धनराशि से धौलादेवी, हरिनगरी, धरमघर और मुनस्यारी में 200 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय के पौधों का प्लांटेशन होगा। 200 हेक्टेयर क्षेत्र में बागान का रखरखाव और 25 लाख पौधों की नर्सरी विकसित की जानी है।
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बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि धनराशि अवमुक्त होने पर नए क्षेत्रों में बागान विकसित किए जाएंगे। बोर्ड के माध्यम से चार हजार मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है वहीं प्रदेश 2612 काश्तकार चाय उत्पाद से जुड़ चुके हैं।