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मिश्रित, सघन वनों के संरक्षण से होंगी नदियां पुनर्जीवित
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:18 PM IST
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अल्मोड़ा। स्याहीदेवी विकास समिति शीतलाखेत ने उत्तराखंड सरकार द्वारा कुमाऊं की कोसी और गढ़वाल में नंधौर नदी के पुनर्जीवन के लिए अभियान चलाने का स्वागत किया है। समिति ने मांग उठाई है कि चौड़ी पत्तीदार मिश्रित और सघन वनों के संरक्षण किया जाना जरूरी है।
समिति के संयोजक गिरीश चंद्र शर्मा ने कहा है कि किन कारणों से कोसी और नंधौर नदियों की स्थिति दयनीय हो गई है। इस पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे नाले, गधेरों से मिलकर कोसी एक नदी के रूप में आगे बढ़ती है।
चौड़ी पत्तीदार मिश्रित और सघन वनों से निकलने वाले जल स्रोतों से इन छोटे-छोटे गधेरों और नालों की उत्पत्ति होती है, किंतु आज जंगलों के अनियंत्रित और अवैज्ञानिक कटान, दोहन और भीषण वनाग्नि के कुप्रभावों से चौड़ी पत्तीदार मिश्रित और सघन वन समाप्ति की ओर हैं। जिस कारण इन जंगलों से निकले वाले जल स्रोत भी लगभग सूख चुके हैं अथवा सूखने के कगार पर हैं।
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जब तक नदियों को सूखने के लिए जिम्मेदार इन मूल कारणों के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाएगी, तब तक केवल वर्षा जल संरक्षण से इन नदियों, जल स्त्रोतों का संरक्षण होना असंभव है।
समिति ने मिश्रित वनों का अनियमित और अवैज्ञानिक दोहन रोकने के लिए ग्रामीणों को उचित कीमत पर धातु निर्मित कृषि उपकरण और रसोई गैस उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। जिससे की जंगलों का संरक्षण हो सके।
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समिति के संयोजक गिरीश चंद्र शर्मा ने कहा है कि किन कारणों से कोसी और नंधौर नदियों की स्थिति दयनीय हो गई है। इस पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे नाले, गधेरों से मिलकर कोसी एक नदी के रूप में आगे बढ़ती है।
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चौड़ी पत्तीदार मिश्रित और सघन वनों से निकलने वाले जल स्रोतों से इन छोटे-छोटे गधेरों और नालों की उत्पत्ति होती है, किंतु आज जंगलों के अनियंत्रित और अवैज्ञानिक कटान, दोहन और भीषण वनाग्नि के कुप्रभावों से चौड़ी पत्तीदार मिश्रित और सघन वन समाप्ति की ओर हैं। जिस कारण इन जंगलों से निकले वाले जल स्रोत भी लगभग सूख चुके हैं अथवा सूखने के कगार पर हैं।
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जब तक नदियों को सूखने के लिए जिम्मेदार इन मूल कारणों के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाएगी, तब तक केवल वर्षा जल संरक्षण से इन नदियों, जल स्त्रोतों का संरक्षण होना असंभव है।
समिति ने मिश्रित वनों का अनियमित और अवैज्ञानिक दोहन रोकने के लिए ग्रामीणों को उचित कीमत पर धातु निर्मित कृषि उपकरण और रसोई गैस उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। जिससे की जंगलों का संरक्षण हो सके।