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आपदा से जिले में 43 पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त
Updated Sun, 08 Oct 2017 11:39 PM IST
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अल्मोड़ा। बरसात में जिले में आपदा से 43 पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई थीं, लेकिन इन योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए जल संस्थान को बजट अब तक जारी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत के लिए 88 लाख रुपये की जरूरत है, लेकिन दैवीय आपदा मद से विभाग को पैसा नहीं मिला है। हालांकि जल संस्थान ने इन योजनाओं को किसी तरह कामचलाऊ बना रखा है, लेकिन यह योजनाएं आए दिन क्षतिग्रस्त होती रहती हैं और 52 गांवों के लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है।
जिले में अल्मोड़ा और रानीखेत डिवीजन के अंतर्गत जल संस्थान के पास छह सौ से अधिक पेयजल योजनाएं हैं। गत बरसात में अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत 22 और रानीखेत डिवीजन के अंतर्गत 21 पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई थीं। इन पेयजल योजनाओं के दुरुस्त नहीं होने से 52 गांवों की हजारों की आबादी को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा था। जल संस्थान ने इन योजनाओं को किसी तरह कामचलाऊ बना रखा है। योजनाओं की मरम्मत नहीं होने से पानी लिकेज समेत योजनाएं हल्की बारिश में भी क्षतिग्रस्त होती रहती हैं और ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
विभाग को इन योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए कुल 88 लाख रुपये की जरुरत है, लेकिन दैवीय आपदा मद से यह पैसा नहीं मिला है। जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता केएस खाती ने बताया कि क्षतिग्रस्त योजनाओं के इस्टीमेट बना लिए गए हैं, लेकिन दैवीय आपदा मद से बजट नहीं मिला है। हालांकि आपदा के समय विभाग ने 22 लाख रुपये से इन योजनाओं की मरम्मत कर उन्हें काम चलाऊ बना रखा है, लेकिन यह बजट भी जल संस्थान को उपलब्ध नहीं हो सका है।
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जिले में 24 हैंडपंप हुए निष्क्रिय, 24 खराब
अल्मोड़ा। जिले के विभिन्न स्थानों पर जल संस्थान ने लोगों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए 1400 हैंडपंप स्थापित कर रखे हैं। इनमें से करीब दो दर्जन हैंडपंप खराब हैं, वहीं 24 हैंड पंप निष्क्रिय हो गए हैं। साथ ही 100 हैंडपंप ऐसे हैं जिनमें से निकलने वाले पानी में आयरन की मात्रा अधिक है। एसई केएस खाती ने बताया कि जिन हैंडपंपों में आयरन की मात्रा अधिक है ऐसे हैंडपंपों में आयरन रिमूवर किट लगाया गया है, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके। खराब पड़े हैंडपंपों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा।
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जिले में अल्मोड़ा और रानीखेत डिवीजन के अंतर्गत जल संस्थान के पास छह सौ से अधिक पेयजल योजनाएं हैं। गत बरसात में अल्मोड़ा डिवीजन के अंतर्गत 22 और रानीखेत डिवीजन के अंतर्गत 21 पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई थीं। इन पेयजल योजनाओं के दुरुस्त नहीं होने से 52 गांवों की हजारों की आबादी को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा था। जल संस्थान ने इन योजनाओं को किसी तरह कामचलाऊ बना रखा है। योजनाओं की मरम्मत नहीं होने से पानी लिकेज समेत योजनाएं हल्की बारिश में भी क्षतिग्रस्त होती रहती हैं और ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।
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विभाग को इन योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए कुल 88 लाख रुपये की जरुरत है, लेकिन दैवीय आपदा मद से यह पैसा नहीं मिला है। जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता केएस खाती ने बताया कि क्षतिग्रस्त योजनाओं के इस्टीमेट बना लिए गए हैं, लेकिन दैवीय आपदा मद से बजट नहीं मिला है। हालांकि आपदा के समय विभाग ने 22 लाख रुपये से इन योजनाओं की मरम्मत कर उन्हें काम चलाऊ बना रखा है, लेकिन यह बजट भी जल संस्थान को उपलब्ध नहीं हो सका है।
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जिले में 24 हैंडपंप हुए निष्क्रिय, 24 खराब
अल्मोड़ा। जिले के विभिन्न स्थानों पर जल संस्थान ने लोगों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए 1400 हैंडपंप स्थापित कर रखे हैं। इनमें से करीब दो दर्जन हैंडपंप खराब हैं, वहीं 24 हैंड पंप निष्क्रिय हो गए हैं। साथ ही 100 हैंडपंप ऐसे हैं जिनमें से निकलने वाले पानी में आयरन की मात्रा अधिक है। एसई केएस खाती ने बताया कि जिन हैंडपंपों में आयरन की मात्रा अधिक है ऐसे हैंडपंपों में आयरन रिमूवर किट लगाया गया है, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके। खराब पड़े हैंडपंपों को जल्द दुरुस्त कराया जाएगा।