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बंदरों तथा सूअरों का आतंक बढने से काश्तकार परेशान
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:48 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले के अनेक गांवों में बंदरों और सुअरों का आतंक बढ़ने से खेती करना मुश्किल होते जा रहा है। जंगली जानवर किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
जिले के गैनार, रमतोला, चिलागाड़ा, कोटगाड़ा, ल्वेटा, सरयूड़ी, सल्ला भाटकोट, मंगलता, नाली, चौसाला, पोखरी, गौली, दन्यां, भनार, आटी, कफलनी, मयोली, टकोली, बसाण, लमटाना, थली, छड़ोजा, कुटोली, कुंज, सैनोली, चौकुना, बरम, थामथोली आदि गांवों में बंदरों और सुअरों का आतंक काफी बढ़ गया है। जानवर काश्तकारों द्वारा उगाई गई सब्जी और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदर कई बार घर और घर की छतों में आकर उत्पात मचा रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वह बाजार से महंगा बीज खरीद कर सब्जी उगाते हैं, लेकिन ज्यों ही सब्जी तैयार होती है सुअर और बंदर उसे नष्ट कर देते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें बीज की लागत भी नहीं मिल पाती है। जानवरों के आतंक के कारण लोगों का सब्जी उत्पादन औरखेती से लगातार मोह कम होते जा रहा है।
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जिले के गैनार, रमतोला, चिलागाड़ा, कोटगाड़ा, ल्वेटा, सरयूड़ी, सल्ला भाटकोट, मंगलता, नाली, चौसाला, पोखरी, गौली, दन्यां, भनार, आटी, कफलनी, मयोली, टकोली, बसाण, लमटाना, थली, छड़ोजा, कुटोली, कुंज, सैनोली, चौकुना, बरम, थामथोली आदि गांवों में बंदरों और सुअरों का आतंक काफी बढ़ गया है। जानवर काश्तकारों द्वारा उगाई गई सब्जी और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदर कई बार घर और घर की छतों में आकर उत्पात मचा रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि वह बाजार से महंगा बीज खरीद कर सब्जी उगाते हैं, लेकिन ज्यों ही सब्जी तैयार होती है सुअर और बंदर उसे नष्ट कर देते हैं। ऐसे में कई बार उन्हें बीज की लागत भी नहीं मिल पाती है। जानवरों के आतंक के कारण लोगों का सब्जी उत्पादन औरखेती से लगातार मोह कम होते जा रहा है।
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