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पंद्रह वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका सीवर लाइन का काम
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:04 PM IST
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अल्मोड़ा। स्वच्छ भारत अभियान पूरे देश में जोर-शोर से चलाया जा रहा है। इसको लेकर बड़ेे-बड़े दावे भी किए जा रहे हैं पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पंद्रह साल बाद भी सीवर लाइन का काम पूरा नहीं हुआ है। शहर के एक चौथाई हिस्से में ही सीवर लाइन बिछी है। शेष कार्य को पूरा करने के लिए पिछले एक दशक से बजट नहीं मिला है। सीवर के अभाव में कई लोग चोरी छिपे घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं।
सीवर लाइन बिछाने के लिए शहर को चार जोन में बांटा गया था। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ। पहले चरण में 6.10 करोड़ लागत से प्रथम जोन के अंतर्गत हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, राजपुर, मकेड़ी में सीवर लाइन डाली गई और कनेक्शन दिए गए। दूसरे चरण में तृतीय जोन का 2005 में कार्य शुरू किया गया। सरकार ने जल निगम सर्वे शाखा को 8.10 करोड़ के के सापेक्ष 4.85 करोड़ जारी किए।
निर्माण एजेंसी ने पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, चंपानौला, खोल्टा झझाड़, गुरुरानीखोला, सांई बाबा मंदिर क्षेत्र में लाइन बिछाई पर इसके बाद एक धेला भी सरकार ने नहीं दिया और कार्य ठप पड़ा है। इस जोन के शेष हिस्सों जोशीखोला, थपलिया आदि हिस्सों में सीवर लाइन नहीं पड़ सकी।
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2007 से अवशेष काम के लिए बजट मिला ही नहीं मिला है। लोअर मालरोड में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं बन सका है। इसके अलावा शेष दो जोनों का काम भी प्रारंभ नहीं हुआ है। सीवर के अभाव में कई लोग घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं।
बाक्स
शासन के निर्देश पर प्राकलन बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन तकनीकी आपत्ति के चलते अब पुन: आगणन बनाकर भेजा जा रहा है।
एन लाल, अधिशासी अभियंता, निर्माण शाखा उत्तराखंड पेयजल निगम, अल्मोड़ा।
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सीवर लाइन बिछाने के लिए शहर को चार जोन में बांटा गया था। उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ। पहले चरण में 6.10 करोड़ लागत से प्रथम जोन के अंतर्गत हीराडुंगरी, एनटीडी, जेल परिसर, राजपुर, मकेड़ी में सीवर लाइन डाली गई और कनेक्शन दिए गए। दूसरे चरण में तृतीय जोन का 2005 में कार्य शुरू किया गया। सरकार ने जल निगम सर्वे शाखा को 8.10 करोड़ के के सापेक्ष 4.85 करोड़ जारी किए।
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निर्माण एजेंसी ने पांडेखोला, कपीना, उप्रेतीखोला, चंपानौला, खोल्टा झझाड़, गुरुरानीखोला, सांई बाबा मंदिर क्षेत्र में लाइन बिछाई पर इसके बाद एक धेला भी सरकार ने नहीं दिया और कार्य ठप पड़ा है। इस जोन के शेष हिस्सों जोशीखोला, थपलिया आदि हिस्सों में सीवर लाइन नहीं पड़ सकी।
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2007 से अवशेष काम के लिए बजट मिला ही नहीं मिला है। लोअर मालरोड में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं बन सका है। इसके अलावा शेष दो जोनों का काम भी प्रारंभ नहीं हुआ है। सीवर के अभाव में कई लोग घरों की गंदगी नालियों में बहा देते हैं।
बाक्स
शासन के निर्देश पर प्राकलन बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन तकनीकी आपत्ति के चलते अब पुन: आगणन बनाकर भेजा जा रहा है।
एन लाल, अधिशासी अभियंता, निर्माण शाखा उत्तराखंड पेयजल निगम, अल्मोड़ा।