{"_id":"596b9fb84f1c1b75778b4629","slug":"31500225464-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभी नहीं लगे विकासखंडों में स्वचालित मौसम स्टेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभी नहीं लगे विकासखंडों में स्वचालित मौसम स्टेशन
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी परियोजना के अंतर्गत कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र और भारत मौसम विज्ञान केंद्र के सहयोग से राज्य के सभी जिलों के विकासखंडों में स्वचालित मौसम स्टेशन और स्वचालित वर्षामापी यंत्र लगाए जाने प्रस्तावित थे। अल्मोड़ा में भी सभी 11 विकासखंडों में यह यंत्र लगाए जाने थे, लेकिन अभी तक यह यंत्र नहीं लग सके हैं। जिसके कारण वर्षा का दबाव, हवा की गति और बर्फबारी समेत तापमान आदि की सटीक जानकारी जिला मुख्यालय से नहीं मिल पा रही है।
कुछ माह पूर्व उत्तराखंड शासन ने स्वचालित मौसम स्टेशन लगाने के लिए सभी जिला मुख्यालयों से अपने जिले के प्रत्येक विकासखंड में जमीन की उपलब्धता संबंधी प्रस्ताव मांगे थे और इसके बाद निविदाएं भी आमंत्रित कर ली गई थीं, लेकिन चार माह गुजर गए अभी तक विकासखंडों में ये स्टेशन तैयार नहीं हो सके हैं।
इन स्वचालित यंत्रों की स्थापना से मौसम के पूर्वानुमान का पता लगने के साथ ही तापमान, आर्द्रता, वर्षा का दबाव, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, हवा की गति और दिशा संबंधी आदि के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती । यंत्रों में लगे सेंसरों के माध्यम से सारा डाटा जिले में स्थापित आपदा प्रबंधन इकाई और मौसम विज्ञान केंद्र को सीधे ट्रांसफर भी हो जाता है। वर्तमान में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तहसीलों में स्थापित वर्षामापी यंत्र से केवल वर्षा के आंकड़े ही मिल पाते हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि जिले के सभी विकासखंड में लगने वाले यंत्रों के लिए जमीन का चयन कर सूची शासन को भेज दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुछ माह पूर्व उत्तराखंड शासन ने स्वचालित मौसम स्टेशन लगाने के लिए सभी जिला मुख्यालयों से अपने जिले के प्रत्येक विकासखंड में जमीन की उपलब्धता संबंधी प्रस्ताव मांगे थे और इसके बाद निविदाएं भी आमंत्रित कर ली गई थीं, लेकिन चार माह गुजर गए अभी तक विकासखंडों में ये स्टेशन तैयार नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
इन स्वचालित यंत्रों की स्थापना से मौसम के पूर्वानुमान का पता लगने के साथ ही तापमान, आर्द्रता, वर्षा का दबाव, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, हवा की गति और दिशा संबंधी आदि के बारे में सटीक जानकारी मिल जाती । यंत्रों में लगे सेंसरों के माध्यम से सारा डाटा जिले में स्थापित आपदा प्रबंधन इकाई और मौसम विज्ञान केंद्र को सीधे ट्रांसफर भी हो जाता है। वर्तमान में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तहसीलों में स्थापित वर्षामापी यंत्र से केवल वर्षा के आंकड़े ही मिल पाते हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि जिले के सभी विकासखंड में लगने वाले यंत्रों के लिए जमीन का चयन कर सूची शासन को भेज दी गई है।
विज्ञापन