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कोसी कैचमेंट एरिया में हरेले पर रोपे जाएंगे एक लाख से अधिक पौधे
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:32 PM IST
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अल्मोड़ा। कोसी नदी पुनर्जीवीकरण के लिए हरेला पर्व पर 16 जुलाई को कोसी कैचमेंट एरिया में एक लाख से अधिक चौड़ी पत्ती प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। पौधरोपण के लिए अब तक मनरेगा के माध्यम से चौदह हजार गड्ढे खोद लिए गए हैं। हरेला पर्व पर पौधरोपण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के भी आने की संभावना है।
कोसी कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख नदी है। कौसानी के निकट धारपानी धार से इसका उद्गम है। इसकी 21 सहायक नदियां हैं और 97 जलधारा हैं। जलागम की ऐसी ही 49 सहायक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करने के लिए कार्य किया जाना है। यह योजना मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी शामिल है। सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए पौधरोपण किया जाना है। साथ ही कोसी कैचमेंट एरिया के गांवों में चाल-खाल भी बनाए जाने हैं। फिलहाल इस योजना में प्रशासन को कोई बजट नहीं मिला है, लेकिन जिला प्रशासन मनरेगा योजना के तहत चाल-खाल और गड्ढे खुदान का कार्य करवा रहा है। पुनर्जीवीकरण कार्य के लिए कोसी कैचमेंट एरिया को 14 रिचार्ज जोनों में बांटा गया है।
हरेला पर्व पर 16 जुलाई को कोसी कैचमेंट एरिया के 100 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख से अधिक पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। यह पौधे कोसी नदी के उद्गम स्थल धारपानी से बैराज तक लगाने का लक्ष्य है। जिला विकास अधिकारी मो. असलम ने बताया कि कोसी कैचमेंट एरिया के हवालबाग विकासखंड क्षेत्र में 5300 गड्ढे, ताकुला ब्लॉक में 5400 गड्ढे, सोमेश्वर वन रेंज में एक हजार के अलावा करीब 2300 गड्ढे अल्मोड़ा वन रेंज, वन पंचायत, आरक्षित और सिविल वन क्षेत्र में खोदे गए हैं। हरेला पर्व तक एक लाख से अधिक गड्ढे खोद लिए जाएंगे। हरेला पर्व पर पौधरोपण अभियान में ईको टाक्स फोर्स, एसएसबी, आईटीबीपी, सेना समेत अन्य संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी।
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कोसी कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख नदी है। कौसानी के निकट धारपानी धार से इसका उद्गम है। इसकी 21 सहायक नदियां हैं और 97 जलधारा हैं। जलागम की ऐसी ही 49 सहायक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करने के लिए कार्य किया जाना है। यह योजना मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट में भी शामिल है। सूख चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए पौधरोपण किया जाना है। साथ ही कोसी कैचमेंट एरिया के गांवों में चाल-खाल भी बनाए जाने हैं। फिलहाल इस योजना में प्रशासन को कोई बजट नहीं मिला है, लेकिन जिला प्रशासन मनरेगा योजना के तहत चाल-खाल और गड्ढे खुदान का कार्य करवा रहा है। पुनर्जीवीकरण कार्य के लिए कोसी कैचमेंट एरिया को 14 रिचार्ज जोनों में बांटा गया है।
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हरेला पर्व पर 16 जुलाई को कोसी कैचमेंट एरिया के 100 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख से अधिक पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। यह पौधे कोसी नदी के उद्गम स्थल धारपानी से बैराज तक लगाने का लक्ष्य है। जिला विकास अधिकारी मो. असलम ने बताया कि कोसी कैचमेंट एरिया के हवालबाग विकासखंड क्षेत्र में 5300 गड्ढे, ताकुला ब्लॉक में 5400 गड्ढे, सोमेश्वर वन रेंज में एक हजार के अलावा करीब 2300 गड्ढे अल्मोड़ा वन रेंज, वन पंचायत, आरक्षित और सिविल वन क्षेत्र में खोदे गए हैं। हरेला पर्व तक एक लाख से अधिक गड्ढे खोद लिए जाएंगे। हरेला पर्व पर पौधरोपण अभियान में ईको टाक्स फोर्स, एसएसबी, आईटीबीपी, सेना समेत अन्य संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी।
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