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कोसी नदी में बन रहे इंटेकवेल के लीकेज ट्रीटमेंट का कार्य शुरू 15-12-45
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम ने कोसी नदी में 10.87 करोड़ रुपये की
लागत से निर्माणाधीन इंटेकवेल में लीकेज ट्रीटमेंट का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह कार्य आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की राय से किया जा रहा है।
एक पखवाड़े में ट्रीटमेंट का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद पेयजल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा पंप स्थापित करने का कार्य किया जाना है।
मालूम हो कि नगर में पेयजल आपूर्ति करने के लिए कोसी बैराज के समीप इंटेकवेल का निर्माण किया जा रहा है। गत नवंबर में निर्माणाधीन इंटेकवेल की तलहटी से पानी रिसकर अंदर पहुंचने लगा था। जिसके सुधारीकरण के लिए गत 23 नवंबर को कोसी बैराज को खाली कर दिया गया था। इसके बाद संबंधित ठेकेदार ने कोसी नदी में बने इंटेकवेल के चारों ओर तलहटी तक करीब बीस फुट तक खुदाई कर ली है। अब इंटेकवेल में लीकेज के ट्रीटमेंट का काम प्रारंभ कर दिया गया है।
उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता केडी भट्ट ने बताया कि शासन से अब तक पांच करोड़ रुपये जारी हुए हैं। इस धनराशि का काम हो गया है। इंटेकवेल लीकेज ट्रीटमेंट का काम आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों की राय से किया जा रहा है। ट्रीटमेंट का काम फरवरी अंतिम तक पूरा कर लिया जाएगा।
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लागत से निर्माणाधीन इंटेकवेल में लीकेज ट्रीटमेंट का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह कार्य आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की राय से किया जा रहा है।
एक पखवाड़े में ट्रीटमेंट का कार्य पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद पेयजल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा पंप स्थापित करने का कार्य किया जाना है।
मालूम हो कि नगर में पेयजल आपूर्ति करने के लिए कोसी बैराज के समीप इंटेकवेल का निर्माण किया जा रहा है। गत नवंबर में निर्माणाधीन इंटेकवेल की तलहटी से पानी रिसकर अंदर पहुंचने लगा था। जिसके सुधारीकरण के लिए गत 23 नवंबर को कोसी बैराज को खाली कर दिया गया था। इसके बाद संबंधित ठेकेदार ने कोसी नदी में बने इंटेकवेल के चारों ओर तलहटी तक करीब बीस फुट तक खुदाई कर ली है। अब इंटेकवेल में लीकेज के ट्रीटमेंट का काम प्रारंभ कर दिया गया है।
उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता केडी भट्ट ने बताया कि शासन से अब तक पांच करोड़ रुपये जारी हुए हैं। इस धनराशि का काम हो गया है। इंटेकवेल लीकेज ट्रीटमेंट का काम आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों की राय से किया जा रहा है। ट्रीटमेंट का काम फरवरी अंतिम तक पूरा कर लिया जाएगा।
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