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20 किमी कंधे पर सिलेंडर लेकर चले हैं कभी
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 30 Apr 2016 11:01 PM IST
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भुजान में रखे सिलेंडर
- फोटो : अमर उजाला
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ताड़ीखेत विकासखंड के चापड़, हिड़ाम और मुसोली जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीण आज भी 10 किमी की पैदल दूरी तय कर खाली रसोई गैस सिलेंडरों को भुजान पहुंचाते हैं और फिर वहां से भरे गैस सिलेंडर कंधों पर लाद कर गांव तक पहुंचाते हैं।
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तमाम प्रयासों के बावजूद इस क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडर का वाहन नहीं पहुंच रहा है। जबकि यहां 350 से अधिक गैस के उपभोक्ता हैं। वाहन नहीं पहुंचने से ग्रामीणों का धन और समय दोनों बरबाद हो रहा है। विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्र चापड़, बच्यूड़ी, बल्याली, हिड़ाम, बैड़ी, मुसोली, पिनोली,लोधियाखान और बिल्लेख क्षेत्र में कुल 350 से अधिक रसोई गैस के उपभोक्ता हैं, लेकिन इस क्षेत्र में अभी तक रसोई गैस सिलेंडरों का वाहन नहीं पहुंचता है, जबकि चापड़ तक मोटर मार्ग बन चुका है।
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सामाजिक कार्यकर्ता दीपक जोशी ने बताया कि पूर्व में जनप्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र में नियमित गैस सिलेंडर का वाहन भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। लोग 10 किमी पैदल कंधों पर सिलेंडर रखकर भुजान पहुंचाते हैं।इधर रानीखेत गैस गोदाम के स्टोर कीपर श्यामाचरण कांडपाल ने बताया कि चापड़ और इससे लगे क्षेत्रों में सिलेंडर का वाहन पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही वाहन पहुंचेगा।
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