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ऑनलाइन बिक्री के विरोध में बंद रही दवा की दुकानें
Updated Fri, 28 Sep 2018 10:54 PM IST
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अल्मोड़ा। ऑनलाइन दवा की बिक्री के विरोध में अल्मोड़ा जिले में दवा की सभी दुकानें बंद रहीं। इस दौरान मरीजों और तीमारदारों को दवा के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि जिला और बेस अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र खुले रहे। जन औषधि केंद्रों में सुबह से ही काफी भीड़ लगी रही।
केमिस्ट और ड्रग एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के नोटिफिकेशन को हटाने की मांग करते हुए विरोध स्वरूप शुक्रवार को दवा की दुकानों को बंद रखा। अल्मोड़ा जिले में दवा की करीब 70 दुकानें हैं और इनके बंद रहने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के इस नियम से दवा व्यवसाय के व्यापार को नुकसान पहुंचेगा। एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टलों द्वारा दवा कानून के नियमों का धड़ल्ले से दुरुपयोग किया गया है।
पोर्टल बगैर किसी जवाबदारी के दवा के पर्चे की प्रमाणिकता को परखे बगैर दवा उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। जिला अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र में कार्यरत मीनाक्षी ने बताया कि जन औषधि केंद्र में शुक्रवार को पूरे दिन लाइन लगी रही। जिससे जन औषधि केंद्र में दवाओं की बिक्री में काफी इजाफा हुआ। हालांकि उधर कई मरीजों ने आरोप लगाया कि आज भी कई डॉक्टरों ने जन औषधि केंद्र के लिए दवा नहीं लिखी जिससे उन्हें दवा के बगैर वापस लौटना पड़ा।
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केमिस्ट और ड्रग एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के नोटिफिकेशन को हटाने की मांग करते हुए विरोध स्वरूप शुक्रवार को दवा की दुकानों को बंद रखा। अल्मोड़ा जिले में दवा की करीब 70 दुकानें हैं और इनके बंद रहने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के इस नियम से दवा व्यवसाय के व्यापार को नुकसान पहुंचेगा। एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन पोर्टलों द्वारा दवा कानून के नियमों का धड़ल्ले से दुरुपयोग किया गया है।
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पोर्टल बगैर किसी जवाबदारी के दवा के पर्चे की प्रमाणिकता को परखे बगैर दवा उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। जिला अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र में कार्यरत मीनाक्षी ने बताया कि जन औषधि केंद्र में शुक्रवार को पूरे दिन लाइन लगी रही। जिससे जन औषधि केंद्र में दवाओं की बिक्री में काफी इजाफा हुआ। हालांकि उधर कई मरीजों ने आरोप लगाया कि आज भी कई डॉक्टरों ने जन औषधि केंद्र के लिए दवा नहीं लिखी जिससे उन्हें दवा के बगैर वापस लौटना पड़ा।
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