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पहली बार हो रही आनलाइन पशुओं की गणना 15-24-56
Updated Mon, 26 Nov 2018 10:37 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले में पशुओं की गणना शुरू हो गई है। इसमें पहली बार ऑनलाइन प्रणाली अपनाई जा रही है। इसके लिए 60 संगणक और 12 सुपरवाइजरों की ड्यूटी लगाई गई है, जो घर-घर जाकर विभिन्न प्रकार के सभी पालतू पशुओं की गणना कर रहे हैं। जिससे सरकार और विभाग को पशुधन के सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत पशुओं की गणना के लिए प्रत्येक पांच साल का समय निर्धारित है। पशुगणना के बाद सरकार उसी के अनुसार पशुधन विकास की नीति बनाती है। इससे पहले 2012 में पशुगणना हुई थी। पांच वर्ष बाद 2017 में पशुगणना होनी थी, लेकिन किसी कारण नहीं हो सकी। अब इस वर्ष पशुओं की गणना हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन व्यवसाय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार है। पशुगणना के तहत गौवंशीय, महिषवंशीय, बकरी, भेड़, घोड़ा, खच्चर, गधे, मुर्गी, बतख, कुत्ते, खरगोश समेत सभी पालतू पशुओं की गणना की जानी है। पशुपालन विभाग के देखरेख में रविवार 25 नवंबर से पशुगणना प्रारंभ हो गई है।
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संगणक घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजीव चंद्रा ने बताया कि पशुगणना के लिए 60 संगणक और सात सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। जिन्हें टेबलेट दिए गए हैं।
संगणक घर-घर जाकर मौके पर ही पशुओं की गणना कर ऑनलाइन डाटा फीड कर रहे हैं, जिसकी सीधे मुख्यालय को भी जानकारी मिल रही है। साथ ही मैपिंग भी की जा रही। नई पशुगणना होने के बाद सरकार को पशुधन के सटीक आंकड़े मिल सकेंगे। पशुगणना पूरी करने के लिए तीन माह का समय निर्धारित किया गया है।
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राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत पशुओं की गणना के लिए प्रत्येक पांच साल का समय निर्धारित है। पशुगणना के बाद सरकार उसी के अनुसार पशुधन विकास की नीति बनाती है। इससे पहले 2012 में पशुगणना हुई थी। पांच वर्ष बाद 2017 में पशुगणना होनी थी, लेकिन किसी कारण नहीं हो सकी। अब इस वर्ष पशुओं की गणना हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन व्यवसाय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार है। पशुगणना के तहत गौवंशीय, महिषवंशीय, बकरी, भेड़, घोड़ा, खच्चर, गधे, मुर्गी, बतख, कुत्ते, खरगोश समेत सभी पालतू पशुओं की गणना की जानी है। पशुपालन विभाग के देखरेख में रविवार 25 नवंबर से पशुगणना प्रारंभ हो गई है।
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संगणक घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजीव चंद्रा ने बताया कि पशुगणना के लिए 60 संगणक और सात सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। जिन्हें टेबलेट दिए गए हैं।
संगणक घर-घर जाकर मौके पर ही पशुओं की गणना कर ऑनलाइन डाटा फीड कर रहे हैं, जिसकी सीधे मुख्यालय को भी जानकारी मिल रही है। साथ ही मैपिंग भी की जा रही। नई पशुगणना होने के बाद सरकार को पशुधन के सटीक आंकड़े मिल सकेंगे। पशुगणना पूरी करने के लिए तीन माह का समय निर्धारित किया गया है।