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जिला विकास प्राधिकरण बनने के बाद से दो आवेदन स्वीकृत
Updated Sat, 03 Mar 2018 09:40 PM IST
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अल्मोड़ा। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में अब सभी तरह के निर्माण के लिए जिला विकास प्राधिकरण में मानचित्र पास कराना जरूरी है। जिला विकास प्राधिकरण बनने के बाद से लोगों को मानचित्र पास करवाने में दिक्कत आ रही है। प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक सिर्फ दो आवेदन पत्र स्वीकृत हो सके हैं। प्राधिकरण से आ रही दिक्कतों को लेकर कुछ दिन पूर्व व्यापार मंडल समेत विभिन्न संगठनों ने जिलाधिकारी समेत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा था।
विकास प्राधिकरण बनने के बाद से जिले से दस लोगों ने निर्माण कार्यों की स्वीकृति देने के लिए प्राधिकरण कार्यालय में आवेदन किए थे। जिनमें से दो लोगों को कुछ दिन पहले ही अनुमति मिली है जबकि अन्य आवेदकों के नक्शे मानकों में खरे नहीं उतर पाए थे। विकास प्राधिकरण कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अन्य आवेदकों के दोबारा नक्शे बनवाए जा रहे हैं। दरअसल प्राधिकरण बनने के बाद से मध्यम और गरीब वर्ग के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए थोड़ा मुश्किलें आ रही हैं। प्राधिकरण का शुल्क ज्यादा होने के साथ ही मानचित्र भी मानकों में खरे नहीं उतर पा रहे हैं। जिस कारण आवेदकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि कुछ दिन पूर्व अल्मोड़ा पहुंचे कुमाऊं संभाग के टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव ने भी मानचित्रों में आ रही कमियों को लेकर मानचित्रकारों को एक दिवसीय ट्रेनिंग के लिए हल्द्वानी भी बुलाया था। उसके बाद से अब तक दो मानचित्र पास हुए हैं। इधर व्यापार मंडल और अन्य संगठनों का कहना है कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण के मानकों में आपत्तियों और सुझावों को स्वीकार किया जाए। निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों को लेकर पिछले पालिका में भी सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई थी। जिसमें सभी संगठनों के लोगों ने प्राधिकरण बनने से निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों का हवाला देते हुए पर्वतीय क्षेत्र में प्राधिकरण के नियमों में सरलीकरण करने की मांग की थी। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी इस मुद्दे को लेकर शहरी विकासमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्राधिकरण के नियमों में सरलीकरण करने की मांग की है। इधर लोगों को आ रही परेशानी के संबंध में जिला विकास प्राधिकरण सचिव कैलाश सिंह टोलिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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विकास प्राधिकरण बनने के बाद से जिले से दस लोगों ने निर्माण कार्यों की स्वीकृति देने के लिए प्राधिकरण कार्यालय में आवेदन किए थे। जिनमें से दो लोगों को कुछ दिन पहले ही अनुमति मिली है जबकि अन्य आवेदकों के नक्शे मानकों में खरे नहीं उतर पाए थे। विकास प्राधिकरण कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अन्य आवेदकों के दोबारा नक्शे बनवाए जा रहे हैं। दरअसल प्राधिकरण बनने के बाद से मध्यम और गरीब वर्ग के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए थोड़ा मुश्किलें आ रही हैं। प्राधिकरण का शुल्क ज्यादा होने के साथ ही मानचित्र भी मानकों में खरे नहीं उतर पा रहे हैं। जिस कारण आवेदकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि कुछ दिन पूर्व अल्मोड़ा पहुंचे कुमाऊं संभाग के टाउन प्लानर एसएम श्रीवास्तव ने भी मानचित्रों में आ रही कमियों को लेकर मानचित्रकारों को एक दिवसीय ट्रेनिंग के लिए हल्द्वानी भी बुलाया था। उसके बाद से अब तक दो मानचित्र पास हुए हैं। इधर व्यापार मंडल और अन्य संगठनों का कहना है कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण के मानकों में आपत्तियों और सुझावों को स्वीकार किया जाए। निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों को लेकर पिछले पालिका में भी सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई थी। जिसमें सभी संगठनों के लोगों ने प्राधिकरण बनने से निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों का हवाला देते हुए पर्वतीय क्षेत्र में प्राधिकरण के नियमों में सरलीकरण करने की मांग की थी। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने भी इस मुद्दे को लेकर शहरी विकासमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्राधिकरण के नियमों में सरलीकरण करने की मांग की है। इधर लोगों को आ रही परेशानी के संबंध में जिला विकास प्राधिकरण सचिव कैलाश सिंह टोलिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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