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क्वारब-पेटशाल मार्ग का निर्माण अधर में लटका
Updated Thu, 01 Mar 2018 09:40 PM IST
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अल्मोड़ा। सरकार और मुख्यमंत्रियों द्वारा की गई घोषणाएं सालों बाद भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। जिसका उदाहरण करीब आठ साल पहले स्वीकृत की गई 28 किमी लंबी क्वारब-पेटशाल सड़क है। इस सड़क को अब तक वनभूमि की स्वीकृति तक नहीं मिल पाई है। जिस कारण सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है और सुयाल नदी से लगे करीब एक दर्जन गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। सरकार ने सड़क के लिए 9.80 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर रखे हैं।
अल्मोड़ा शहर की सड़कों में वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। सड़कों में यातायात का दबाव कम करने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने करीब आठ साल पहले क्वारब-पेटशाल बाइपास सड़क बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने इस सड़क के लिए 9.80 करोड़ रुपये भी मंजूर कर रखे हैं।
इस सड़क से बनने से जहां सुयाल नदी से लगे करीब एक दर्जन गांव यातायात सुविधा से जुड़ेंगे, वहीं पिथौरागढ़, बेरीनाग, गंगोलीहाट, दन्यां, लमगड़ा, शहरफाटक आदि क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों और पर्यटकों को अल्मोड़ा नगर आने की जरुरत नहीं पड़ेगी। यह वाहन क्वारब, विश्वनाथ होते हुए सीधे पेटशाल होते हुए गंतव्य को जा सकेंगे। जिससे शहर की सड़कों में भी यातायात का दबाव कम होगा। पर संबंधित विभागों की लचर कार्यप्रणाली के चलते इस सड़क को अब तक वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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इस कारण मार्ग का निर्माण अधर में लटक हुआ है। इधर प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता एचसी पांडे ने बताया कि सड़क निर्माण में कटने वाले पेड़ों के क्षतिपूर्ति के लिए पौधरोपण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिससे मार्ग को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिली है।
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अल्मोड़ा शहर की सड़कों में वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। सड़कों में यातायात का दबाव कम करने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने करीब आठ साल पहले क्वारब-पेटशाल बाइपास सड़क बनाने की घोषणा की थी। सरकार ने इस सड़क के लिए 9.80 करोड़ रुपये भी मंजूर कर रखे हैं।
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इस सड़क से बनने से जहां सुयाल नदी से लगे करीब एक दर्जन गांव यातायात सुविधा से जुड़ेंगे, वहीं पिथौरागढ़, बेरीनाग, गंगोलीहाट, दन्यां, लमगड़ा, शहरफाटक आदि क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों और पर्यटकों को अल्मोड़ा नगर आने की जरुरत नहीं पड़ेगी। यह वाहन क्वारब, विश्वनाथ होते हुए सीधे पेटशाल होते हुए गंतव्य को जा सकेंगे। जिससे शहर की सड़कों में भी यातायात का दबाव कम होगा। पर संबंधित विभागों की लचर कार्यप्रणाली के चलते इस सड़क को अब तक वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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इस कारण मार्ग का निर्माण अधर में लटक हुआ है। इधर प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता एचसी पांडे ने बताया कि सड़क निर्माण में कटने वाले पेड़ों के क्षतिपूर्ति के लिए पौधरोपण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिससे मार्ग को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिली है।