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पुलिस से नोटिस मिलने पर संगठन तथा कर्मचारी तिलमिलाए
Updated Thu, 30 Aug 2018 11:06 PM IST
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अल्मोड़ा। संसद द्वारा पारित अनुसूचित जाति-जनजाति संरक्षण कानून के विरोध में अल्मोड़ा में निकले जुलूस में शामिल संगठनों और कर्मचारियों को पुलिस द्वारा नोटिस देने से संगठन और कर्मचारी तिलमिला गए हैं। नोटिस मिलने से नाराज संगठनों के पदाधिकारी बृहस्पतिवार को एसएसपी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। एसएसपी के वहां मौजूद नहीं होने पर वह सीओ कमल राम आर्या से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
अनुसूचित जाति-जनजाति संरक्षण कानून के विरोध में सवर्ण महासभा कुमाऊं के आह्वान पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और संगठनों से जुड़े लोगों ने मंगलवार की शाम को चौघानपाटा से नगर में टार्च लाइट जुलूस निकाला था। पुलिस ने जुलूस में शामिल संगठन और कर्मचारियों को नोटिस भेजे हैं। पुलिस का कहना है कि जुलूस में प्रतिभाग करने से पूर्व संगठनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी। बृहस्पतिवार को संगठनों की चौघानपाटा में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पुलिस द्वारा दिया गया नोटिस द्वेष भावना से प्रेरित है।
कहा कि नोटिस में जुलूस में प्रतिभाग करने से पहले संगठनों द्वारा पुलिस को सूचना नहीं देने की बात कही गई जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि जुलूस में उन्होंने सवर्ण नागरिक के रूप में हिस्सा लिया है न कि सरकारी कर्मचारी के तौर पर। उन्होंने कहा कि नोटिस वापस लिए जाएं अन्यथा संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा।
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इसके बाद समिति के लोगों का शिष्टमंडल सीओ कमल राम आर्या से मिला और उन्हें ज्ञापन दिया। सीओ से मिलने वालों में मिनिस्टीरियल फेडरेशन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंदन सिंह नैनवाल, राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष हीरा सिंह बोरा, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के डीके जोशी, चतुर्थ वर्गीय महासंघ के ललित तिवारी आदि शामिल थे। इधर सवर्ण संघर्ष समिति के अध्यक्ष देव सिंह टंगड़िया और सचिव विजय भट्ट ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून के विरोध में निकले जुलूस में शहर के गणमान्य लोगों, व्यापारियों, पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्द्ध सैनिक, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। पुलिस द्वारा सिर्फ पांच कर्मचारी संगठनों को नोटिस देना पक्षपात पूर्ण रवैया है।
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अनुसूचित जाति-जनजाति संरक्षण कानून के विरोध में सवर्ण महासभा कुमाऊं के आह्वान पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और संगठनों से जुड़े लोगों ने मंगलवार की शाम को चौघानपाटा से नगर में टार्च लाइट जुलूस निकाला था। पुलिस ने जुलूस में शामिल संगठन और कर्मचारियों को नोटिस भेजे हैं। पुलिस का कहना है कि जुलूस में प्रतिभाग करने से पूर्व संगठनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी। बृहस्पतिवार को संगठनों की चौघानपाटा में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पुलिस द्वारा दिया गया नोटिस द्वेष भावना से प्रेरित है।
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कहा कि नोटिस में जुलूस में प्रतिभाग करने से पहले संगठनों द्वारा पुलिस को सूचना नहीं देने की बात कही गई जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि जुलूस में उन्होंने सवर्ण नागरिक के रूप में हिस्सा लिया है न कि सरकारी कर्मचारी के तौर पर। उन्होंने कहा कि नोटिस वापस लिए जाएं अन्यथा संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा।
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इसके बाद समिति के लोगों का शिष्टमंडल सीओ कमल राम आर्या से मिला और उन्हें ज्ञापन दिया। सीओ से मिलने वालों में मिनिस्टीरियल फेडरेशन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंदन सिंह नैनवाल, राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष हीरा सिंह बोरा, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के डीके जोशी, चतुर्थ वर्गीय महासंघ के ललित तिवारी आदि शामिल थे। इधर सवर्ण संघर्ष समिति के अध्यक्ष देव सिंह टंगड़िया और सचिव विजय भट्ट ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून के विरोध में निकले जुलूस में शहर के गणमान्य लोगों, व्यापारियों, पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्द्ध सैनिक, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। पुलिस द्वारा सिर्फ पांच कर्मचारी संगठनों को नोटिस देना पक्षपात पूर्ण रवैया है।