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शाबास वन विभाग.... प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर अपने परिसर में ही देवदार काट डाला
Updated Mon, 18 Sep 2017 11:11 PM IST
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अल्मोड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर जहां देश में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए तमाम कार्यक्रम चलाए गए वहीं अल्मोड़ा में वन विभाग ने इस मौके पर नगर को नायाब तोहफा दिया। वन विभाग ने प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर विभाग की आवासीय कालोनी में स्थित हरे-भरे संरक्षित प्रजाति के एक बड़े देवदार के पेड़ को काट डाला। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी है। इधर वन विभाग के अफसरों का कहना है कि यह पेड़ कालोनीवासियों के लिए खतरा बना था। इसी के चलते प्रभागीय वनाधिकारी ने पेड़ को गिराने की मंजूरी दी।
रविवार को जब पूरे देश में तमाम विभाग ही नहीं सेना के जवान भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोग तमाम कार्यक्रमों में जुटे हुए थे तो इस मौके पर अल्मोड़ा में वन विभाग के लोग डीएफओ कार्यालय परिसर में स्थित एक संरक्षित प्रजाति वाले हरे भरे देवदार के पेड़ को गिराने में जुटे थे और देर शाम तक तक उन्होंने लगभग पूरा पेड़ काट डाला। वन निगम द्वारा लगाए गए मजदूरों ने इस पेड़ के बचे खुचे हिस्से को सोमवार हटाया और फिर ट्रक में लादकर ले गए। इस पेड़ को गिराने की अनुमति अल्मोड़ा वन प्रभाग के डीएफओ एसआर प्रजापति ने दी थी। बताया गया है कि वन विभाग के परिसर में देवदार का यह एकमात्र पेड़ था। इस पेड़ को गिराने पर पर्यावरण प्रेमियों में काफी रोष है। उत्तराखंड लोक वाहिनी के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने देवदार के पेड़ को काटने पर विरोध जताते हुए वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि यह भारी भरकम देवदार का पेड़ सभी प्राणियों को लाभ दे रहा था और इससे क्षेत्र में सुंदरता भी बनी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पेड़ को अकारण ही काट दिया गया है। डा. बिष्ट ने कहा कि एक तरफ लोगों को अपने घरों के ऊपर खतरा बने पेड़ों को कटवाने की अनुमति के लिए रात-दिन वन विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन दूसरी तरफ अफसरों और नेताओं द्वारा आए दिन पेड़ काटे जाने की शिकायतें मिलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय दिवस के दिन अफसर और नेतागण हिमालय बचाने की शपथ लेते देखे गए थे, लेकिन असलियत कुछ और है। जंगलों को काटने से ही पर्यावरण असंतुलन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करके उचित कार्रवाई करने की मांग की है। इधर उप प्रभागीय वनाधिकारी पृथ्वी राज सिंह बिष्ट का कहना है कि देवदार का यह पेड़ कालोनी में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ था और पेड़ की हालत भी ठीक नहीं थी। इसी कारण प्रभागीय वनाधिकारी ने इसे काटने की अनुमति दे दी।
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रविवार को जब पूरे देश में तमाम विभाग ही नहीं सेना के जवान भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोग तमाम कार्यक्रमों में जुटे हुए थे तो इस मौके पर अल्मोड़ा में वन विभाग के लोग डीएफओ कार्यालय परिसर में स्थित एक संरक्षित प्रजाति वाले हरे भरे देवदार के पेड़ को गिराने में जुटे थे और देर शाम तक तक उन्होंने लगभग पूरा पेड़ काट डाला। वन निगम द्वारा लगाए गए मजदूरों ने इस पेड़ के बचे खुचे हिस्से को सोमवार हटाया और फिर ट्रक में लादकर ले गए। इस पेड़ को गिराने की अनुमति अल्मोड़ा वन प्रभाग के डीएफओ एसआर प्रजापति ने दी थी। बताया गया है कि वन विभाग के परिसर में देवदार का यह एकमात्र पेड़ था। इस पेड़ को गिराने पर पर्यावरण प्रेमियों में काफी रोष है। उत्तराखंड लोक वाहिनी के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने देवदार के पेड़ को काटने पर विरोध जताते हुए वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की आलोचना की है।
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उन्होंने कहा कि यह भारी भरकम देवदार का पेड़ सभी प्राणियों को लाभ दे रहा था और इससे क्षेत्र में सुंदरता भी बनी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पेड़ को अकारण ही काट दिया गया है। डा. बिष्ट ने कहा कि एक तरफ लोगों को अपने घरों के ऊपर खतरा बने पेड़ों को कटवाने की अनुमति के लिए रात-दिन वन विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन दूसरी तरफ अफसरों और नेताओं द्वारा आए दिन पेड़ काटे जाने की शिकायतें मिलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय दिवस के दिन अफसर और नेतागण हिमालय बचाने की शपथ लेते देखे गए थे, लेकिन असलियत कुछ और है। जंगलों को काटने से ही पर्यावरण असंतुलन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करके उचित कार्रवाई करने की मांग की है। इधर उप प्रभागीय वनाधिकारी पृथ्वी राज सिंह बिष्ट का कहना है कि देवदार का यह पेड़ कालोनी में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ था और पेड़ की हालत भी ठीक नहीं थी। इसी कारण प्रभागीय वनाधिकारी ने इसे काटने की अनुमति दे दी।
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