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पॉलीटेक्निक चौनलिया समस्याओं से जूझ रहा
Updated Sat, 03 Nov 2018 11:05 PM IST
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भतरौंजखान (अल्मोड़ा)। राजकीय पॉलीटेक्निक चौनलिया अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। इस संस्थान की स्थापना 2008 में हुई थी। शुरू में यहां मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेरेटियल प्रैक्टिस और सिविल इंजीनियरिंग कोर्स स्वीकृत हुए थे, लेकिन सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स दस साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। इस पॉलीटेक्निक के भवन निर्माण में 3.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं लेकिन यहां सिर्फ 10 बच्चे पढ़ रहे हैं।
तमाम समस्याओं से जूझ रहे इस संस्थान में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। हालत यह है कि इस वर्ष मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट कोर्स के प्रथम वर्ष में भी किसी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया है। वर्तमान में सिर्फ 10 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और कुल 22 पद स्वीकृत हैं जिसमें प्रधानाचार्य सहित 15 पद खाली हैं।
पॉलीटेक्निक तक पहुंचने वाली सड़क की हालत भी बहुत खराब है। इस सड़क में गाड़ी का चलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। संस्थान में बच्चों के खेलने के लिए मैदान भी नहीं है। पूर्व में यह विद्यालय आदर्श राजकीय इंटर कालेज के भवन से संचालित होता था पर जुलाई 2018 से पॉलीटेक्निक 3.18 करोड़ रुपये लागत से बने खुद के भवन में स्थानांतरित हो गया। भवन में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को इसका खास फायदा नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि पॉलीटेक्निक में नए रोजगारपरक ट्रेड नहीं खोले गए तो यह भविष्य में बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
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तमाम समस्याओं से जूझ रहे इस संस्थान में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। हालत यह है कि इस वर्ष मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट कोर्स के प्रथम वर्ष में भी किसी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया है। वर्तमान में सिर्फ 10 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और कुल 22 पद स्वीकृत हैं जिसमें प्रधानाचार्य सहित 15 पद खाली हैं।
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पॉलीटेक्निक तक पहुंचने वाली सड़क की हालत भी बहुत खराब है। इस सड़क में गाड़ी का चलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। संस्थान में बच्चों के खेलने के लिए मैदान भी नहीं है। पूर्व में यह विद्यालय आदर्श राजकीय इंटर कालेज के भवन से संचालित होता था पर जुलाई 2018 से पॉलीटेक्निक 3.18 करोड़ रुपये लागत से बने खुद के भवन में स्थानांतरित हो गया। भवन में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को इसका खास फायदा नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि पॉलीटेक्निक में नए रोजगारपरक ट्रेड नहीं खोले गए तो यह भविष्य में बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
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